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पहुना में 108 सामूहिक तुलसी विवाह सम्पन्न
सीधा सवाल। राशमी । परिश्रम से उदरपुर्ति हो सकती है जबकि अधिक धन पूर्वजन्म के पुण्यो से प्राप्त होता है ।सब कुछ नियत है ईश्वरीय कार्य ईश्वर स्वयं करता है जैसे भगवान श्री कृष्ण ने गीता जी में कहा है" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत "
जब-जब धर्म के हानि होगी मैं स्वयं आकर रक्षा करूंगा ।जैसे भगवान राम ने बंदर भालू का साथ लेकर रावण जैसे अत्याचारियो पर विजय प्राप्त की ठीक उसी प्रकार हमें सहयोगी की भूमिका में सब धर्म कार्य के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उक्त विचार विश्व सनातन हिंदू धर्म रक्षा संघ के तत्वावधान में संचालित सनातन हिंदू धर्म रक्षा संघ सनातन हिंदू धर्म जागरण पदयात्रा के 11वें पड़ाव पहुना में आयोजित 108 सामूहिक तुलसी विवाह एवं संस्कार भागवत के आखिरी दिन संत श्री राधेश्याम सुखवाल ने प्रकट किए। इस अवसर पर गौ रक्षा का संदेश देते हुए गोग्रास की प्रेरणा से 17151 रुपए स्थानीय गौशाला को प्रदान किए गए।
16108 तुलसी विवाह का संकल्प लेकर किए जा रहे आयोजनों की कड़ी में अब तक 4000 से अधिक सामूहिक तुलसी विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।
प्रतिवर्ष 111 दिन की पदयात्रा विगत 4 वर्षों से संचालित है अब तक 5000 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा कर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा, सनातन हिंदू संस्कारों की पुनर्स्थापना एवं धर्म जागरण के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह यात्रा निकाली जा रही हे
इससे पूर्व ठाकुर जी एवं तुलसी जी की शोभायात्रा निकाली गई।तोरण रस्म के बाद108 तुलसी जी एवं सालिगराम जी के जोड़ो का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चार एवं आहुतियों के साथ सम्पन्न हुआ।