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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। भारतीय संविधान के साथ-साथ सामाजिक परंपराओं में भी राष्ट्रीय प्रतीकों एवं राष्ट्रीय ध्वज के प्रति विशेष सम्मान है। पिछले कुछ समय से राष्ट्र प्रेम की भावना को जागृत करने के लिए तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन किए जाते हैं। लेकिन चित्तौड़गढ़ में जिला मुख्यालय पर कलेक्टर आवास के सामने प्रताप पार्क में शहीद स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज लहराने के लिए विशेष स्थान चिन्हित किया गया जहां एक बड़ा तिरंगा लहरा रहा है लेकिन उसकी स्थिति ऐसी है मानो इसे लहरा देने के बाद जिम्मेदारों की जिम्मेदारी खत्म हो गई है। इतने महत्वपूर्ण स्थान पर लहराया गया तिरंगा फट रहा है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि रखरखाव के लिए जिम्मेदारों को ना तो अपनी जिम्मेदारी से कोई लेना देना है ना ही राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्र प्रेम की भावना से कोई मतलब है। फटा और उधड़ा हुआ तिरंगा यह साबित कर रहा है कि जिम्मेदारों के मन में राष्ट्रपति कोई प्रेम नहीं अपितु केवल और केवल औपचारिकता शेष रह गई है। बड़ी बात यह है कि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद चित्तौड़गढ़ की है और इसका प्रशासनिक का कार्यभार सुनियोजित नगर विकास के लिए जिम्मेदार नगर विकास न्यास के सचिव कैलाश गुर्जर के पास है। ऐसे में सवाल उठता है कि भले ही उनका शहर के सुनियोजित विकास टूटी हुई सड़क गंदे पानी के जमाव से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन यह तिरंगा हमारे राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है और जनमानस में राष्ट्र प्रेम की भावना को प्रेरित करने का माध्यम है ऐसे में इसके प्रति लापरवाही यह साफ तौर पर इंगित करती है की जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी एक और जहां जनता के प्रति गंभीर नहीं है वहीं राष्ट्रीय गौरव के प्रति भी पूरी तरह लापरवाह है। अधिकांश अधिकारी इसी मार्ग से होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय में जाते हैं अब कितने दिन से यह फटा हुआ तिरंगा अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है यह तो जांच का विषय है लेकिन फिलहाल इस स्थिति में लहराते तिरंगे को देखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।