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अस्पताल प्रबंधन में भी मांगा जवाब
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ। केंद्र और राज्य की सरकार के दिव्यांग जनों को संबल प्रदान करने के गलत तथ्य प्रस्तुत कर लाभ लेने के मामले में समाचार प्रकाशन के बाद राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा जिला मुख्यालय पर संचालित एआरटी केंद्र चित्तौड़गढ़ कि कार्मिक मंजू राव द्वारा दिनांक 7 मई 2026 से राज्य सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन बंद करवा ली है। वही इधर इस मामले में केंद्र के श्री सांवलिया जी राजकीय चिकित्सालय से संबंधित होने के चलते प्रमुख चिकित्सा अधिकारी द्वारा भी तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई है। हालांकि इस संबंध में रिपोर्ट को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। परंतु सीधा सवाल की पड़ताल में और भी तथ्य निकाल कर सामने आए हैं जो इस कार्मिक द्वारा राज्य सरकार के साथ गलत तथ्य प्रस्तुत करते हुए लाभ लेने की कार्यप्रणाली और षड्यंत्र को प्रमाणित करते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जवाब प्रस्तुत करते समय मामले को कमजोर करने के लिए पेंशन बंद करवाई गई ताकि कार्रवाई से बचने का जुगाड़ लगाया जा सके। लेकिन लगातार सामने आ रही जानकारियां पूरे मामले में विशेष योग्यजनों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले लाभ को धोखेबाजी करते हुए कूट रचित दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित षडयंत्र का बना रही है। फिलहाल इस मामले में सीधा सवाल की पड़ताल जारी है। वहीं दूसरी ओर विभाग भी जांच कर रहा है ऐसे में और किस प्रकार का खुलासा हो पता है यह देखने वाली बात होगी।
मार्च तक की उठा ली पेंशन खबर छपने के बाद हुई बंद
सीधा सवाल के पास उपलब्ध दस्तावेजों में यह सामने आया है कि राजस्थान सरकार से मानदेय के आधार पर हजारों रुपए की तनख्वाह उठने वाली मंजु राव द्वारा राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली पेंशन की राशि साल 2017 से मार्च 2026 तक उठाई गई है। वहीं इसके द्वारा साल 2020 में राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी में 19000 से अधिक की तनख्वाह पर सेवा भी ज्वाइन कर ली। लेकिन उसके बाद भी इसके द्वारा पेंशन लगातार ली जाती रही। गत 6 मई के अंक में सीधा सवाल द्वारा इस गड़बड़ी को लेकर समाचार का प्रकाशन किया गया और 7 मई को पेंशन बंद होने की सूचना पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगी। वही जब इस मामले में उपखंड कार्यालय और नगर परिषद में संबंधितों से जानकारी ली गई तो उन्होंने पेंशन बंद करने का आवेदन प्राप्त होने से इनकार किया है। ऐसे में राज्य सरकार से हजारों की तनख्वाह लेने के बाद किसी दिव्यांग अभ्यर्थी का अधिकारों का हनन करने के इस मामले में रिकवरी के भी प्रावधान है । अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार सरकार को षड्यंत्र करते हुए धोखेबाजी कर लाभ लेने के मामले में किस प्रकार रिकवरी की प्रक्रिया पूरी करते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों द्वारा लाभ लिए जाने के बाद राज्य सरकार द्वारा रिकवरी की गई।
स्कूटी योजना में भी गड़बड़ जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध
विशेष योग्य जनों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन करती है। स्कूटी वितरण योजना भी इसी का एक अंग है। लेकिन इस कार्मिक द्वारा इसे भी नहीं छोड़ा गया। 40% से अधिक दिव्यांग होने एवं पारिवारिक आय दो लाख रुपए से कम होने पर इस योजना का लाभ दिया जाता है। परंतु पेंशन प्राप्त करने वालों के लिए आय का प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। और पेंशन का लाभार्थी होने का फायदा उठाते हुए कार्मिक द्वारा स्कूटी भी प्राप्त कर ली गई। जबकि जिस समय उसे स्कूटी प्राप्त हुई उससे पहले ही उसकी आय 2 लाख 40 हजार से अधिक हो रही थी और यदि इसमें पेंशन की राशि को जोड़ दिया जाए तो यह सालाना आय ढाई लाख का आंकड़ा पार कर रही है। ऐसे में दस्तावेजों का सत्यापन करने को लेकर जांच करने वाले कार्मिक की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि स्कूटी मिलने से पहले भी इस बाबत शिकायत की गई थी लेकिन उसे गोलमोल कर दिया गया।
सब जुड़े हुए ,चूक या षड्यंत्र ..!
इस पूरे मामले में सामने आया है कि राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन करवाया गया था जिसकी फाइल सीएमएचओ कार्यालय से अग्रेषित होकर जयपुर गई थी। और स्कूटी वितरण के कमेटी के सदस्य के रूप में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी पदेन सदस्य है। ऐसे में एक तरफ तो सेवा को प्रमाणित किया जा रहा था वहीं दूसरी ओर एक योग्य दिव्यांग अभ्यर्थी का इसी कार्यालय द्वारा अधिकार हनन किया जा रहा था। इससे सवाल खड़ा होता है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या तो अपने अधीनस्थ कार्मिकों पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं या फिर जानबूझकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी को भूल के रूप में दर्शाया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की भी भूमिका है। ऐसे में इस कार्मिक का इस प्रकार षड्यंत्र करते हुए लाभान्वित हो जाना गले नहीं उतर रहा है।
तथ्यात्मक रिपोर्ट का नोटिस जारी मेडिकल बोर्ड से जांच पर सवाल...!
इस मामले में लगातार जिस प्रकार की कूट रचित दस्तावेजों की जानकारियां सामने आ रही है उससे मामला और भी संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। समाचार प्रकाशन के बाद गंभीरता दिखाते हुए प्रमुख चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश वैष्णव द्वारा कार्मिक के संदर्भ में तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई है। एक और जहां पुराने प्रमाण पत्रों को लेकर लाभान्वितों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं वही इस षड्यंत्रकारी कार्मिक द्वारा साल 2022 में ऑनलाइन हुए प्रमाण पत्र का भौतिक सत्यापन नहीं करवाना पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रहा है। ऐसी स्थिति में जिले भर के लोगों का भौतिक सत्यापन करने वाले चिकित्सालय में संचालित केंद्र में काम करने वाली इस कार्मिक के दिव्यांग प्रमाण पत्र का मेडिकल बोर्ड से भौतिक सत्यापन करवाया जाए तो इस मामले में और भी बड़ा खुलासा हो सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि प्रमाण पत्र में दिव्यांगता का प्रतिशत बिल्कुल न्यूनतम श्रेणी का पाया जाएगा जिससे किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल सकता है। साथ ही इस बात की भी प्रबल संभावना है कि इस श्रेणी से ही यह कार्मिक बाहर हो जाए। ऐसे में इस मामले में मेडिकल बोर्ड का गठन और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक प्रतीत हो रही है।