चित्तौड़गढ़ - मैदान हुआ खाली फिर भी वसूली बाकी,पीजी कॉलेज के खेल मैदान के दुरुपयोग का मामला
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सीधा सवाल की खबर के बाद कॉलेज प्रशासन ने रोका प्रशिक्षण

मानवेंद्र सिंह चौहान /सुभाष चंद्र

सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़।
जिला मुख्यालय की प्रतिष्ठा का प्रतिरुप और उच्चतर शिक्षा के सरकारी क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण केंद्र राजकीय महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के खेल मैदान को निजी न्यू टैलेंट क्रिकेट अकादमी द्वारा बिना विकास शुल्क जमा कराए उपयोग करने के मामले में सीधा सवाल की खबर का बड़ा असर सामने आया है। खबर प्रकाशन के बाद राजकीय महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधन द्वारा एक बार फिर बिना कॉलेज प्रशासन की स्वीकृति के खेल मैदान में चल रही अकादमी के प्रशिक्षण को रुकवा दिया गया है। लंबे समय से प्रशांत चौधरी द्वारा खेल प्रतिभाओं को निखारने के नाम पर क्रिकेट की जिला स्तर की सबसे बड़ी संस्था जिला क्रिकेट संघ से जुड़े होने का फायदा उठाते हुए राजकीय महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय का खेल मैदान प्रयोग किया जा रहा था। अब भले ही महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा कॉलेज का खेल मैदान खाली करवा दिया गया है,लेकिन लंबे समय तक बिना स्वीकृति अपने निजी फायदे के लिए इस खेल मैदान के उपयोग को लेकर महाविद्यालय के कोष में जमा कराई जाने वाली महाविद्यालय की विकास शुल्क की राशि वसूल करने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में महाविद्यालय के राजकीय कोष को हुए नुकसान के मामले में वसूली की प्रक्रिया कब शुरू होगी यह एक बड़ा सवाल है। जिसका फिलहाल महाविद्यालय प्रशासन के पास भी कोई जवाब नहीं है। ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि मानो महाविद्यालय प्रबंधन की मंशा केवल प्रशिक्षण रुकवाने तक सीमित है ,महाविद्यालय के आर्थिक नुकसान को लेकर प्रबंधन गंभीर प्रतीत नहीं हो रहा है।

ना स्वीकृति ना शुल्क बना दिया टीन शेड
जिला मुख्यालय पर विधि विरुद्ध तरीके से बिना प्रबंधन की स्वीकृति के महाविद्यालय के खेल मैदान में निजी अकादमी के संचालन को लेकर लगातार नई जानकारियां सामने आ रही है। एक ओर जहां अकादमी संचालन के लिए खेल मैदान के उपयोग की कोई स्वीकृति नहीं ली गई है। वही महाविद्यालय के खेल मैदान परिसर में संचालक प्रशांत चौधरी द्वारा टीन शेड का निर्माण भी करवा दिया गया है। जो वर्तमान में वहां बना हुआ है। इससे स्पष्ट है कि लंबे समय से इस खेल मैदान का प्रयोग करते हुए मनमानी की जा रही थी जिस पर सीधा सवाल की खबर प्रकाशित होने के बाद आनन -फानन में प्रशिक्षण तो रुकवा दिया गया, लेकिन खेल मैदान के मूल रूप को बिगाड़ने अनाधिकृत निर्माण करने और राजकोष को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में फिलहाल प्रबंधन गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न संस्थाएं यदि खेल आयोजन के लिए खेल मैदान का प्रयोग करती है ,तो उनसे महाविद्यालय विकास शुल्क लिया जाता है। यह छात्रों के और महाविद्यालय के विकास में प्रयोग होता है। जानकारों का कहना है कि 7 सालों से चल रही इस अकादमी का यदि अन्य संस्थाओं से लिए जाने वाले शुल्क के अनुपात में विकास शुल्क वसूल किया जाए तो यह राशि लाखों में होगी। जिससे आधारभूत ढांचागत विकास करवाया जा सकता है, लेकिन मानो प्रशांत चौधरी पर प्रबंधन इस कदर मेहरबान है, कि राजकोष को चूना लगाने के इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बंद हुई एकेडमी नहीं रुका खेल
खेल प्रशिक्षण के नाम पर राशि लेकर जिला क्रिकेट संघ के संसाधन और महाविद्यालय के मैदान के निजी उपयोग को लेकर मामला प्रकाशन के बाद भले ही क्रिकेट का खेल बंद होने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए क्रिकेट के सर्वेसर्वा और खुद को जिले में क्रिकेट की ऑक्सीजन साबित करने वाले प्रशांत चौधरी की कमाई बंद हो गई है। सोशल मीडिया के के जरिए बेचारा बन कर चौधरी द्वारा इस बात का प्रचार किया जा रहा है ,कि खिलाड़ी परेशान होंगे। लेकिन वास्तविकता यह है कि खिलाड़ियों का खेल किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं हुआ है। नियमित रूप से कॉलेज ग्राउंड पर फुटबॉल ,टेनिस बॉल से क्रिकेट और नियमित रूप से क्रिकेट अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है अपितु बिना किसी रोक-टोक के खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे हैं। केवल प्रशांत चौधरी की निजी अकादमी से जुड़े वसूली के खेल को बंद किया गया है। जिसका खिलाड़ियों से कोई लेना-देना नहीं है।

प्रशांत चौधरी का दावा जो दे उसका भी भला जो ना दे उसका भी भला
इधर इस मामले में खबर प्रकाशन के बाद प्रशांत चौधरी ने सीधा सवाल से संपर्क किया और बताया कि उनके द्वारा किसी से राशि की मांग नहीं की जा रही है। क्रिकेट महंगा खेल है। इसलिए इसमें गेंद नेट और अन्य सामग्री महंगी आती है। उन्होंने दावा किया कि वह किसी से पैसा नहीं मांगते हैं ,लेकिन कोई देता है तो उसे मना नहीं करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा ली गई राशि खिलाड़ियों की सामग्री के लिए उपयोग ली जाती है। ऐसे में सीधे तौर पर भले ही पैसा लेने से इनकार कर रहे हैं । लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि देने की मनाही नहीं है। इससे स्पष्ट है कि पूरे मामले में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। केवल एक बात स्पष्ट है कि जिस प्रकार अन्य खेल प्रतियोगिता आयोजन करने वाले खेल मैदान का प्रयोग करते हैं ,उसी प्रकार महाविद्यालय के खेल मैदान का उपयोग किया गया है। जिसकी राशि दूसरों से ली जा रही है,लेकिन प्रशांत चौधरी से नहीं ली गई।

इधर सोशल मीडिया पर ग्राउंड पर झाड़ू का दावा, खेल पर लगा दी झाड़ू
प्रशांत चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके द्वारा ग्राउंड पर झाड़ू लगाने बेरोजगार होने जैसे कई दावे किए हैं। लेकिन जिले के क्रिकेट से जुड़े लोगों में चर्चा है, कि झाड़ू खेल के मैदान पर नहीं बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य पर लगाई जा रही थी। बाहरी खिलाड़ियों को बुलाकर उन्हें चित्तौड़ जिले की टीम से खिलाया जा रहा था। लंबे समय से यह प्रक्रिया जारी थी ,जिससे कई खिलाड़ियों का मोह भंग हो गया और परेशान होकर खिलाड़ियों ने या तो क्रिकेट छोड़ दिया या फिर जिला छोड़कर अन्य जगह अपने खेल के भविष्य की तलाश में जुटे हुए हैं। क्रिकेट से जुड़े कई लोगों ने इस मामले में सीधा सवाल को उनके पास दस्तावेज़ होने की बात भी कही है। जिससे साफ होता है कि झाड़ू खेल के मैदान पर नहीं बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य पर लगाई जा रही थी। और बाहरी खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए उन्हें उपकृत करने के साथ-साथ उपकृत होने का खेल भी चल रहा था।

हमने मैदान से हटवा दिया है लेकिन किसी अन्य कार्य में व्यस्त होने से नोटिस नहीं दे पाए हैं। महाविद्यालय कोष को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
एच एन व्यास प्राचार्य राजकीय महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय


महाविद्यालय प्रबंधन जब अन्य संस्थाओं से मैदान उपयोग के लिए विकास शुल्क ले रहा है तो सभी के लिए समान नियम होने चाहिए। इस मामले में भी महाविद्यालय प्रशासन द्वारा नियम अनुसार कार्यवाही करते हुए राशि ली जानी चाहिए।
कविश शर्मा निवर्तमान जिला अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन


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