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मृत्युभोज में धोवरा प्रथा व विवाह समारोह पर सीमा तय
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। सालवी समाज पंच मेवाड़ा सुधार समिति चौखला चंदेरिया की पुठोली स्थित लालबाई फूलबाई धर्मशाला में प्रत्येक अमावस को होने वाली बैठक इस बार आमसभा के रूप में हुई जिसमें सैंकड़ों की संख्या में समाजजनों ने भाग लिया। सभी पंचों ने आम राय से हाथ खड़े करते हुए तीन मुख्य प्रस्तावों पर एकमत होकर सहमति दी।
जानकारी देते हुए चौखला अध्यक्ष मदनलाल सालवी ने बताया कि प्रत्येक माह को अमावस पर होने वाली सालवी समाज पंच मेवाड़ा सुधार समिति चौखला चन्देरिया की होने वाली बैठक शुक्रवार 19 दिसम्बर को इस बार आमसभा के रूप में हुई जिसमें सर्वसम्मति से तीन मुख्य प्रस्तावों पर एकमत निर्णय पारित किया गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान समस्त पंच पटेलों की उपस्थिति में समस्त समाजजनों ने मुख्य तीन निर्णय लिये जिसमें मृत्युभोज को सीमित करते हुए केवल एक मिठाई ही बनाने, धोवरा प्रथा बंद करने सहित शादी समारेह में दो तोला सोना, आधा किलो चांदी ही रखे जाने सीमा तय की गई। नियमों के उल्लंघन पर समाजहित के लिये गये निर्णयों में उक्त व्यक्ति की भागीदारी नहीं मानी जाकर समाज द्वारा कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया जाएगा।
इस अवसर पर चौखला महामंत्री मन्नालाल सालवी, सभाध्यक्ष रतनलाल सालवी, किशनलाल सालवी, कालूराम बड़ोदिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हंसराज सेगवा, रतनलाल मेड़ीखेड़ा, महासभा अध्यक्ष राजेन्द्र सुरजना, रोशनलाल सालवी, उदयराम पुठोली, बख्तावरलाल, गोवर्धनलाल, आजोलिया का खेड़ा, देवीलाल, सागर, नानूराम, नंदलाल, नारायणलाल, मांगीलाल, अम्बालाल पुठोली, लालू मूंगा का खेड़ा, बालूलाल सिरड़ी, डालचंद ओडून्द, रतनलाल आछोड़ा, सोहन, हजारीलाल सांवरियानगर, श्यामलाल, छगनलाल, उंकारलाल, गोपाललाल, रामचन्द्र बिलिया, लादूलाल, नंदलाल बोदियाना, शिवलाल चंदेरिया, कालूलाल रामदेवजी का चंदेरिया, रामचन्द्र, नारायणलाल रोलाहेड़ा, हीरालाल, देवकृष्ण धनेत, किशोर खर्राटा, रामलाल पांडोली, सुखलाल लोडीखेड़ा, रतन जगदीश सौपुरा, भेरूलाल सालेरा, अम्बालाल सुवानिया, रामेश्वरलाल नगरी, बालुलाल लालास, उगम भाटखेड़ा, नारूलाल गेणिया सहित 52 गांवों के सैंकड़ों की संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
इस अवसर पर चौखला महामंत्री मन्नालाल सालवी, सभाध्यक्ष रतनलाल सालवी, किशनलाल सालवी, कालूराम बड़ोदिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हंसराज सेगवा, रतनलाल मेड़ीखेड़ा, महासभा अध्यक्ष राजेन्द्र सुरजना, रोशनलाल सालवी, उदयराम पुठोली, बख्तावरलाल, गोवर्धनलाल, आजोलिया का खेड़ा, देवीलाल, सागर, नानूराम, नंदलाल, नारायणलाल, मांगीलाल, अम्बालाल पुठोली, लालू मूंगा का खेड़ा, बालूलाल सिरड़ी, डालचंद ओडून्द, रतनलाल आछोड़ा, सोहन, हजारीलाल सांवरियानगर, श्यामलाल, छगनलाल, उंकारलाल, गोपाललाल, रामचन्द्र बिलिया, लादूलाल, नंदलाल बोदियाना, शिवलाल चंदेरिया, कालूलाल रामदेवजी का चंदेरिया, रामचन्द्र, नारायणलाल रोलाहेड़ा, हीरालाल, देवकृष्ण धनेत, किशोर खर्राटा, रामलाल पांडोली, सुखलाल लोडीखेड़ा, रतन जगदीश सौपुरा, भेरूलाल सालेरा, अम्बालाल सुवानिया, रामेश्वरलाल नगरी, बालुलाल लालास, उगम भाटखेड़ा, नारूलाल गेणिया सहित 52 गांवों के सैंकड़ों की संख्या में समाजजन मौजूद रहे।