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सीधा सवाल। बड़ीसादड़ी।
नगर के इतिहास में पहली बार इतना भव्य और ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव देखने को मिला, जहां अष्ट दिवसीय दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत मुमुक्ष नेहा ने श्राविका जीवन से वैराग्य पथ पर अग्रसर होकर जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की और नव दीक्षिता धृशाप्रभा महाराज के रूप में संयम जीवन की शुरुआत की।
यह दीक्षा 15 वर्षों के अंतराल के बाद उसी दीक्षा वटवृक्ष के नीचे संपन्न हुई, जहां ओजस्वी वक्ता चिराग मुनि के सानिध्य में विधि-विधान से दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा के क्षणों में पूरा दीक्षा स्थल जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रावक-श्राविकाओं की साक्षी में नेहा ने 12 व्रतों से आगे बढ़कर पांच महाव्रतों को स्वीकार किया। दीक्षा स्थल पर पहली बार मंगल पाठ सुनाकर नव दीक्षिता धृशाप्रभा महाराज ने अपने संयमी जीवन की औपचारिक शुरुआत की।
दीक्षा से पूर्व 11.05 बजे मुमुक्ष नेहा ने रजोहरण ग्रहण किया। चतुर्विधि संघ की सर्वसम्मति से दीक्षा की आज्ञा प्रदान की गई। जन्म से वैराग्य तक नेहा नाम से पहचानी जाने वाली मुमुक्ष अब धृशाप्रभा महाराज के नाम से जानी जाएंगी।
दीक्षा महोत्सव में चिराग मुनि, चन्द्रेश मुनि, महासाध्वी अपर्ण प्रज्ञा, महासाध्वी धैर्यप्रभा, मौन साधिका प्राची महाराज सहित 14 साधु-साध्वियों का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।
महोत्सव में चित्तौड़ से यति महाराज, आई.एम. सेठिया, अशोक नवलखा, चेयरमेन विनोद कंठालिया, नीमच चेयरमेन संतोष चोपड़ा, कमलेश ढेलावत सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। दीक्षा के लाभार्थी जिनेन्द्र कुमार नागोता परिवार का भी श्री संघ द्वारा सम्मान किया गया।
दीक्षा के दौरान सांसारिक व धर्म माता-पिता से मिलन, चरण वंदन और छोटी बहन को जिनशासन की सेवा के लिए समर्पित करने के दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया। वहीं सांसारिक भाई मनीष और धर्म भाई उत्सव नागोता को अंतिम बार राखी बांधने का क्षण भी उपस्थित जनसमूह की आंखें नम कर गया।
दीक्षा से पूर्व मुमुक्ष नेहा ने करीब 23 मिनट का भावपूर्ण और आत्मविश्वास से भरा उद्बोधन दिया, जिसने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
देशभर से पहुंचे संघ
इस ऐतिहासिक दीक्षा के साक्षी हरियाणा, पंजाब, पुणे, दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा सहित अनेक शहरों और गांवों से आए संघ बने। सभी का उपरना पहनाकर अभिनंदन किया गया।
नाकोड़ा भैरव स्कूल स्टाफ द्वारा नेमी-राजुल नाटक का मंचन किया गया, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया। तिलक के बाद निकले वरघोड़े में अश्व, ऊंटगाड़ियां, गजराज, ढोल-नगाड़े, गरबा-डांडिया और भजनों के साथ श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। नगरभर में जगह-जगह मुमुक्ष का स्वागत किया गया।
आगामी कार्यक्रम
12 जनवरी, सोमवार को दिवाकर नगरी डूंगला में नव दीक्षिता धृशाप्रभा महाराज को बड़ी दीक्षा प्रदान की जाएगी। वहीं 22 फरवरी को राजाखेड़ा (हरियाणा) में मुमुक्ष विनीता जैन दीक्षा अंगीकार करेंगी। नगर में हर ओर यही चर्चा रही कि बड़ीसादड़ी में पहले भी दीक्षा महोत्सव हुए हैं, लेकिन ऐसा भव्य, अनुशासित और भावनात्मक दीक्षा महोत्सव पहली बार देखने को मिला, जहां महोत्सव का हर दिन अंतिम दिन जैसा प्रतीत हो रहा था।