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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। राज्य के चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल के शंकर मेनन सभागार में मंगलवार को एक विशेष सभा का आयोजन किया गया। इस विशेष सभा के मुख्य अतिथि आईएएस बाबू लाल मीना, अतिरिक्त मुख्य सचिव, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और रेशम उत्पादन विभाग, उत्तर प्रदेश थे। मुख्य अतिथि के स्कूल पहुंचनेे पर स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया एवं प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी श्रीकुमार ने स्वागत किया। कैडेट राज्यवर्धन सिंह नरुका ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया।
स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि आईएएस बाबू लाल मीणा, सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ (स्कूल नंबर 1371) के एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र हैं और लगभग 40 साल पहले उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी दिल्ली चले गए थे, बाद में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइन की। स्कूल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में आईएएस बाबू लाल मीणा ने कैडेट्स को प्रेरित किया। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कैडेट्स से कहा कि जीवन में सबसे पहली और सबसे बड़ी शक्ति ईमानदारी है। आज के डिजिटल युग में मोबाइल हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन सच्चाई यह है कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग हमें फायदे से ज्यादा नुकसान पहुँचाता है। यह हमारी मौलिक सोच, हमारी क्रिएटिविटी और हमारी मानसिक शक्ति को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है। टेक्नोलॉजी का उपयोग कीजिए, लेकिन उसे अपने चरित्र पर हावी मत होने दीजिए। आपकी सोच, आपकी रीजनिंग पावर, और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता ही आपको एक सच्चा लीडर बनाती है।
आज एआई और आधुनिक टेक्नोलॉजी का जमाना है। दुनिया तेजी से बदल रही है। इसलिए आपको टेक्नोलॉजी, साइंस और इनोवेशन का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। रॉकेट साइंस कठिन जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। सीखने की भूख रखिए, सवाल पूछिए और क्रिटिकल थिंकिंग को अपनी आदत बनाइए। जो खुद को अपडेट नहीं करता, वह समय के साथ पीछे छूट जाता है। उन्होनें कहा कि सिर्फ ज्ञान ही सब कुछ नहीं है, जीवन में आगे बढ़ने के लिए वैल्यूज का होना बेहद जरूरी है। अपने से छोटे यानी जूनियर्स को सम्मान देना सीखिए। यही एक सच्चे अधिकारी और अच्छे इंसान की पहचान होती है। अपने टीचर्स और पेरेंट्स का सम्मान करना कभी मत भूलिए। उनके संस्कार, उनकी मेहनत और उनका आशीर्वाद ही आपकी असली पूँजी है। जो अपने माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करता है, उसे कोई शक्ति आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
उन्होने कैडेट्स द्वारा पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए। कैडेट्स से बातचीत के दौरान उन्होंने सभी को एकता और अनुशासन का गुण अपनाने को कहा। इस प्रेरणादायक भाषण ने कैडेट्स के मन में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। उन्होंने इसे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन के रूप में लिया। मंच का संचालन कैडेट अंकित राजपुरोहित ने किया। स्कूल के उप कप्तान कैडेट मधुसुदन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने स्कूल परिवार की ओर से स्मृति चिन्ह भेट किया।