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सीधा सवाल। राशमी। गौ माता में 33 कोटी देवों का वास है। जिनमें प्रमुख रूप से गौमाता के गोबर में लक्ष्मीजी व गौमूत्र में गंगाजी का स्थाई निवास है। इसी कारण से सदियों से आज तक देव पूजन में गोबर एवं गोमूत्र का ही महत्वपूर्ण रूप से प्रयोग किया जाता है l गौमाता के दुग्ध से भी ज्यादा महत्वपूर्ण एवं पवित्रता देने वाला गोबर-गोमूत्र माना गया है। पंचगव्य गाय के दुग्ध, दही ,घृत, गौबर व गौमूत्र को ही माना जाता है, जिसे यज्ञोपवित संस्कार के समय ब्राह्मण स्वयं ग्रहण करते है। उक्त विचार कस्बे के रोशनेश्वर महादेव गोशाला परिसर में विश्व सनातन हिंदू धर्म रक्षा संघ के तत्वावधान में संचालित सनातन हिंदू धर्म रक्षा जागरण पदयात्रा के 15 में पड़ाव पर सामूहिक108 तुलसी विवाह एवं संस्कार भागवत कथा के प्रथम दिवस पर गौ भक्त संत राधेश्याम सुखवाल ने व्यक्त किए। इससे पूर्व धार्मिक भजनों की मधुर स्वर लहरियों के साथ नगर के प्रमुख मार्गो से तुलसी कलश एवं ठाकुर जी की शोभायात्रा निकाली गई जिसमें महिलाएं नाचते गाते चल रही थी। शोभायात्रा में क्षेत्रिय विधायक अर्जुनलाल जीनगर, भाजपा नेता दौलत पोखरना, सुरेश सुवालका, लोकेश सुवालका,सुनील रांका, प्रशासक बंशीलाल रैगर,दिनेश सेन सहित धर्मप्रेमी उपस्थित थे।कथा के बाद भोजनप्रशादी भी करवाई गई।