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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। एनडीपीएस न्यायालय क्रमांक -1 चित्तौड़गढ़ के न्यायाधीश ने शुक्रवार को 2022 के 24 क्विंटल डोडा चूरा तस्करी के मामले में अभियुक्त को 11 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। नारकोटिक्स की और से पकड़े गए मादक पदार्थ के मामले में अभियुक्त प्रकरण की सुनवाई के दौरान लकवे की बीमारी से पीड़ित हो गया था। ऐसे में पकड़े गए मादक पदार्थ के मुकाबले सजा कम सुनाई गई है। लेकिन अभियुक्त को सुनाई गई सजा को जेल में भुगतनी होगी।
एनडीपीएस कोर्ट चित्तौड़गढ़ क्रमांक-1 में नारकोटिक्स की और से विशिष्ट लोक अभियोजक सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि 29 जनवरी 2022 को नारकोटिक्स नीमच के निवारक दल ने चित्तौड़गढ़ जिले में डोडा चूरा पकड़ा। नारकोटिक्स के निरीक्षक परिक्षित चौधरी को मुखबिर के जरिए सूचना मिली की एक टेंकर आरजे 34 जीए 1183 में डोडा चूरा भर कर ओछड़ी टोल नाके से होता हुआ जोधपुर जाएगा। इस पर कार्यवाही करते हुए परिक्षित चौधरी ने रात्रि 3.45 बजे टैंकर को रोका। इसकी तलाशी ली तो पेट्रोल टैंकर के अंदर में 122 कट्टों में भरा हुआ 24 क्विंटल 8 किलो डोडा चूरा पाया गया। वाहन को कपासन थाना क्षेत्र में आने वाले रघुनाथपुरा गांव निवासी ईशाक मोहम्मद चला रहा था। अनुसंधान के दौरान नारकोटिक्स ने बड़ियार थाना मावली निवासी रामलाल जाट और वाहन स्वामी दिनेश पुत्र मांगीलाल विश्नोई निवासी कानावास, जिला जोधपुर को भी मुलजिम बनाया गया। अनुसंधान के बाद तीनों के विरूद्ध 8/28, 8/29, 8/15 और 8/25 में चालान पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक ने न्यायालय में 8 गवाह और दस्तावेज प्रदर्श कराए। इसी दौरान अभियुक्त ईशाक को ट्रायल के दौरान लकवा हो गया। मामले में एनडीपीस कोर्ट क्रमांक 1 के पीठासीन अधिकारी किशनलाल चौधरी ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। परिस्थितियों को देखते हुए ईशाक को 8/15 मेंं दोषी पाया। अभियुक्त को 11 वर्ष का कठोर कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में अन्य को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।