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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने चित्तौड़ दुर्ग का अवलोकन कर विकास कार्यों को लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में दुर्ग पर पर्यटकों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कलेक्टर ने बताया कि दुर्ग स्थित कुंभा महल का मुख्य प्रवेश द्वार जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। वर्तमान में पर्यटक जिस मार्ग से महल में प्रवेश करते हैं, वह संकरा और जोखिमपूर्ण है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। मुख्य द्वार खुलने से पर्यटकों की आवाजाही सुगम और सुरक्षित होगी।
दुर्ग क्षेत्र में बंदरों के आतंक को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर रेलिंग लगाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही चित्तौड़ दुर्ग को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐतिहासिक कुंडों और बावड़ियों की साफ-सफाई के लिए विस्तृत योजना तैयार कर पुरातत्व विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पुरातत्व विभाग और पुलिस प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सड़कों पर खड़े वाहनों को निर्धारित पार्किंग में खड़ा कराने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी, क्योंकि वह पार्किंग शुल्क वसूल करता है, प्रवेश शुल्क नहीं। अब पर्यटकों से टिकट केवल पार्किंग स्थल पर ही लिया जाएगा और सभी पार्किंग के लिए एक समान टिकट व्यवस्था लागू की जाएगी।
दुर्ग विकास के व्यापक कार्यों को लेकर पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग, सांसद, विधायक और नगर पालिका के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पेयजल, सुलभ शौचालय, यात्री विश्राम गृह सहित मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा कर ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर दुर्ग पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।