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सीधा सवाल। डूंगला। दिवाकर नगरी डूंगला ने भारत भर में स्थापित स्थानकवासी जैन परंपरा में अपनी एक अलग पहचान दर्ज की है। हर मौके पर धर्म ध्यान जप तप में आगे रहते हुए विहार यात्रा से लगाकर स्वाध्याय गोचरी सेवा साधु संतों के मध्य अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है । जानकारी में मनीष दाणी ने बताया कि जैन मार्तण्ड दक्षिण भूषण आगम ज्ञाता उपाध्याय प्रवर गौतम मुनि मासा सेवाभावी वैभव मुनि जी मासा की पावन प्रेरणा से प्रत्येक रविवार जैन दिवाकर सामयिक दिवस संडे सामयिक का नया कीर्तिमान स्थापित होता जा रहा है । प्रत्येक रविवार को 100 के लगभग सामयिक कर्ताओं की महावीर भवन में उपस्थिति रहती है वही हर्षोल्लास का सनातनिक माहौल बना रहता है। दाणी ने इस मौके पर बताया कि सामयिक में सबसे पहले भक्तामर पाठ का , रविवार की प्रार्थना, भजन, दिवाकर चालीसा, सामूहिक प्रार्थना, स्वाध्याय, नवकार मंत्र का ध्यान तथा मांगलिक श्रवण का कार्यक्रम होता रहा है । जो दिवाकर नगरी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। यहा यह भी बतादे की यदि इन मोको पर साधु साध्वी जी विराज रहे हो तो उनके सानिध्य का भाव भी बहुत तन्मयता का रहता है। आयोजित कार्यक्रम के बाद लाभार्थी परिवार जीवन कुमार विनोद कुमार लसोड रहे। संडे को आयोजित कार्यक्रम के पश्चात विभिन्न सेवा भावी द्वारा अल्पाहार का कार्यक्रम आयोजित होता है वही अल्पाहार व्यवस्था को करवाते हुवे दिवाकर ग्रुप के युवा साथी अपना साथ निभाते हुए सहयोग प्रदान करते है । यहा यह भी बतादे की समाज जन ने सभी से आग्रह किया कि जो भी व्यक्ति संडे सामयिक से नहीं जुड़ पाए है वह प्रेम सौहार्द और धर्म के इस अभूतपूर्व संगम से खुद को अवश्य जोड़े ,धर्म स्वाध्याय और सामयिक का लाभ ले ।