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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। शहर में रहने वाले एक व्यक्ति ने फेसबुक पर ऐड देख कर ट्रेडिंग करना शुरू किया। ट्रेडिंग के नाम पर प्रार्थी से करीब 72 लाख 55 हजार रुपए की ठगी हो गई। प्रार्थी की रिपोर्ट पर चित्तौड़गढ़ साइबर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर के अनुसंधान शुरू किया है। न्यायालय के आदेश पर साइबर थाने पर प्रकरण दर्ज कर मामले में अनुसंधान किया जा रहा है। पुलिस आरोपियों के संबंध में जांच में जुटी है। न्यायालय के आदेश पर यह प्रकरण दर्ज हुआ है।
चित्तौड़गढ़ साइबर थाना अधिकारी मधु कंवर ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें प्रार्थी ने परिवाद में बताया कि प्रार्थी के पास 22 जून 2024 को फेसबुक पर फीडालीटी कम्पनी का एड आया। इसके लिंक को उसने क्लिक किया तो में एक वाटसअप ग्रुप Fidelity Investments-A009 में वह भी एड हो गया। इसमें प्रार्थी को ट्रेडिंग क्लास लेने के लिए एक लिंक दिया गया, जिसमें भावतोष वाजपेई प्रतिदिन शाम को 8 से 9 बजे तक क्लास लेता था। प्रार्थी ने ट्रेडिंग के लिए करीब दो महीने तक ऑनलाइन क्लास ली। उसके बाद उनके एसिस्टेंस किरण शर्मा ने वॉटसअप नबंर से मैसेज कर ट्रेडिंग करने के लिए पूछा और एक लिंक दिया। इसे खोला तो मोबाइल फोन में एक एप्प इंस्टाल हो गया। प्रार्थी को बताया गया कि ट्रेडिंग में लगाए गए प्रोफिट का 10 प्रतिशत कम्पनी लेगी और सारा प्रॉफिट आपका होगा। प्रार्थी को कस्टमर सर्विस मैनेजर अमितसिंह से सम्पर्क करने के लिए बोला। इसने Fidelity के अकाउन्ट में पैसे जमा करने के लिए बोला। प्रार्थी को ट्रेडिंग का पेमेन्ट डालने के लिए अलग-अलग अकाउन्ट नबंर दिए, जिसमें उसने राशि जमा करवाई। रिपोर्ट के बताया कि प्रार्थी ने 23 जून से 8 अगस्त तक कुल 72 लाख 55 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। उसके बाद प्रार्थी ने भुगतान विड्रो करने कि रिकवेस्ट डाली तो पैसा नहीं मिला। इसके लिए अमितसिंह को बताया तो उसने कहा कि 43 लाख 50 हजार रुपए का और पेमेन्ट डालने को बोला गया। प्रार्थी के कई बार बात करने पर 20 लाख रुपए भुगतान करने को कहा लेकिन उसे ठगी आशंका हो गई। इस पर प्रार्थी ने साईबर थाने में रिपोर्ट दी। प्रार्थी ने भुगतान अपनी पत्नी के बैंक खाते से किया था। साइबर थानाधिकारी मधु कंवर ने बताया कि पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ऑनलाइन भी दी थी रिपोर्ट
एफआईआर में प्रार्थी ने बताया कि
ठगी का पता चलने पर उसने आनलाईन पुलिस हेल्पलाईन नम्बर 1930 पर कॉल कर के रिपोर्ट दर्ज करवाई। यह परिवाद बाद में साइबर पुलिस थाना चित्तौड़गढ़ में परिवाद दर्ज होकर विचाराधीन है। इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो न्यायालय की शरण ली।