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राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
सीधा सवाल। बेगूं। "गौ सम्मान आह्वान अभियान" के अंतर्गत सोमवार को गौ भक्तों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार गोपाललाल को ज्ञापन सौंपा गया। इससे पूर्व क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और गौ भक्तों द्वारा एक शांतिपूर्ण यात्रा का आयोजन पुराना बस स्टैंड से उपखंड कार्यालय तक किया गया। ज्ञापन में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौ संरक्षण हेतु सख्त कानून बनाने की मांग की गई। जानकारी के अनुसार देशभर में 27 अप्रैल सोमवार को "गौ सम्मान आह्वान अभियान" के अंतर्गत बेगूं नगर में भी पुराना बस स्टैंड से उपखंड कार्यालय तक शांतिपूर्ण यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 'गौ माता की जय' एवं 'गौमाता - राष्ट्रमाता' के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण में सराबोर हो गया। यात्रा के उपखंड कार्यालय पहुंचने पर तहसीलदार गोपाललाल जीनगर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि अखिल भारतीय गोवंश, जो हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक चेतना का मूल आधार है, वह अब आपके द्वारा संवैधानिक संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहा है। यह अत्यंत विचारणीय विषय है कि भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन का प्राण कहा जाने वाला 'देशी गोवंश' आज भी सड़कों और खेतों में अत्यंत कष्टप्रद स्थितियों में है। संविधान के अनुच्छेद 48 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) के अंतर्गत यह स्पष्ट निर्देशित है कि राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा तथा विशेष रूप से गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर प्रतिषेध के लिए प्रभावी कदम उठाएगा। इस संवैधानिक अधिदेश की पूर्ण अनुपालना अखिल भारतीय स्तर पर एक समान केंद्रीय नीति के अभाव में आज भी एक अपरिहार्य आवश्यकता गोपालन मंत्रालय की स्थापना हेतु अनुशंसा प्रेषित की जाए, ताकि संपूर्ण राष्ट्र में गौवध पर पूर्ण प्रतिबन्ध लग सके। ज्ञापन में मांग की गई कि राज्य स्तर पर समस्त वधशालाओं (कसाईखाने) के लाइसेंस तुरंत निरस्त कर वध पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को विशेष संकल्प पारित कर प्रस्ताव भेजा जाए, की देशी गोवंश को "राष्ट्रमाता" या "राष्ट्र आराध्या" के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता प्रदान कर उसे विशेष राष्ट्रीय संरक्षण दिया जाए, एवं राज्य स्तर पर भी देशी गोवंश को 'राज्य माता' 'राज्य-आराध्या' घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय ले। गो तस्करी और गो वध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास तथा अपराध में संलिप्त दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का कठोर विधिक प्रावधान हो। पंचगव्य (गोबर-गोमूत्र) अनुसंधान को बढ़ावा देकर इन्हें प्राकृतिक कृषि हेतु जैविक खाद, कीटनाशक और औषधि के रूप में सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ा जाएं। स्कूलों में मिड-डे मील' व मंदिरों के "प्रसाद' में केवल देशी गो-घृत व दुग्ध का उपयोग अनिवार्य हो। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 'नंदीशाला' और जिला स्तर पर न्यूनतम एक 'आदर्श गो अभ्यारण्य' अथवा 'वृहद गोशाला' की स्थापना अनिवार्य हों, जहाँ निराश्रित गोवंश को ससम्मान आश्रय मिलें। राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर प्रति 50 से 100 किमी पर सुसज्जित 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस और 150 से 200 किमी के अंतराल पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटरों की व्यवस्था हो जाएं ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल उपचार मिल सकें। इसके साथ ही स्कूली पाठ्यक्रमों में 'गो-विज्ञान' को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएं ताकि भावी पीढ़ी गोवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय और आर्थिक महत्व को समझ सके।