210
views
views
सीधा सवाल। निम्बाहेड़ा। सोमवार को नगर मे सकल जैन संघ द्वारा हाल ही में संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज की दो शिष्याएं परम पूज्य आर्यिका 105 श्रुतमति माताजी एवं परम पूज्य आर्यिका 105 उपशममति माताजी का मध्यप्रदेश के रीवा नगर में सड़क दुर्घटना में दुखद निधन घटना के बाद जैन समाज में गहरा शोक और चिंता माहौल को लेकर मौन जुलुस निकाल कर उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन दिया गया।
प्रवक्ता मनोज़ सोनी के अनुसार समाज अध्यक्ष अशोक गदिया और महामंत्री वी के जैन की अगुवाई मे सकल जैन श्री संघ समस्त पदाधिकारी सहित अनेक लोगों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए संतों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है।
जैन समाज के अनुसार संत भारतीय संस्कृति, संयम, तप और त्याग के जीवंत प्रतीक होते हैं। उनका जीवन पूरी तरह साधना, अहिंसा, शाकाहार और जनकल्याण को समर्पित रहता है। वे सर्दी, गर्मी और वर्षा तीनों ऋतुओं में कठिन नियमों का पालन करते हुए विहार करते हैं। ऐसे संत-महात्माओं के साथ लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं समाज के लिए चिंताजनक विषय बनती जा रही हैं इस संदर्भ मे संतों की रक्षा और सुरक्षा करना सकल जैन समाज अपणा नैतिक दायित्व मानते हुए सोमवार को नगर के श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर मे एकत्रित हुआ और संतों के विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, एस्कॉर्ट वाहन, सेवा दल और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों पर सरकार से सहयोग अपील की भावना लिए सकल जैन संघ नें स्थानीय उपखण्ड कार्यालय तक मौन जुलुस निकाल उपखण्ड अधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा ।ज्ञापन मे सकल जैन समाज नें अपनी मांग मे लिखा की जब भी कोई संत-महात्मा 20 से 30 किलोमीटर की यात्रा करें, तब उनके साथ सुरक्षा एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया जाए।
सुझाव में यह भी कहा गया है कि यदि संतों के विहार के दौरान किसी वाहन का उपयोग हो तो उसमें GPS सिस्टम लगाया जाए, ताकि ट्रस्ट और समाज के लोगों को लोकेशन की जानकारी मिलती रहे। साथ ही इमरजेंसी बटन जैसी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए, जिससे किसी खतरे की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना भेजी जा सके। इसके अलावा विहार यात्रा से पहले स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचना देकर सुरक्षा सहायता दिलवाए जाने की बात भी कही गई है। धर्म सभा मे संत सुरक्षित किस प्रकार रहें और धर्म और संस्कृति की परंपरा भी सुरक्षा कैसे हो इस पर मंथन किया गया।