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- पूज्य तनसिंह जी के सहगीतों पर हुआ अर्थ-बोध एवं साहित्यिक विमर्श
रितेश लखारा/बाड़मेर। व्यष्टि से समष्टि और समष्टि से परमेष्टि तक पहुंचाने का मार्ग श्री क्षत्रिययुवक संघ बताता है साथ ही संघ अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से परमात्मा से योग साधने की बात एवं व्यवहार में लाने का प्रयास संघ अपने शिविर में करता है।पिछले तीन दिन से हम योग के अष्टांग साधन के बारे में चर्चा कर रहे हैं हमने यम नियम की बात करी आज बात करते हैं आसन की।आसान :सुख पूर्वक स्थिरता प्राप्त करना है परंतु स्थिरता ले कैसे? इस बाबत संघ सर्वप्रथम शारीरिक स्थिरता का अभ्यास विभिन्न कार्यक्रमों में बैठकर जैसे बौद्धिक चर्चा में दो से ढाई घंटे लगातार बैठकर किया जाता है फिर मन को दिए जाने वाले प्रवचन में एकाग्र करने का नियमित अभ्यास करवाया जाता है जिससे मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है फिर प्रवचनों की बात चर्चाओं के माध्यम से संघ दर्शन द्वारा वैचारिक स्थिरता लाता है यह वैचारिक स्थिरता समष्टि योग से परमेष्टी तक पहुंचाने का रास्ता बताता है इस प्रकार शरीर मन विचार एवं अध्यात्म तीनों में सुखद स्थिरता प्राप्त होती है और यही है आसान। यही संघ का योग अष्टांग साधन के अंतर्गत आसन का अभ्यास है यह बात संघ प्रमुख श्री लक्ष्मण सिंह बेन्या का वास ने शनिवार को श्री क्षत्रिय युवक संघ के उच्च प्रशिक्षण शिविर के दौरान अपने प्रातः संदेश में उपस्थित स्वयंसेवकों से कहीं।
प्रातः 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक संस्कार साधना में जुटे 600 स्वयंसेवक
संभाग प्रमुख श्री महिपाल सिंह चुली ने बताया कि प्रातः व्यायाम योग प्रातः क्रीडा के उपरांत पूज्य तन सिंह जी द्वारा लिखित होनहार के खेल कहानी पठन, यज्ञ, अर्थ बोध में सरल है फूलों पर सोना ..प्रतिपल कहानी चल रही … सहगीत जो पूज्य तनसिंह जी द्वारा लिखे गए थे उन पर चर्चा कर अर्थ बोध करवाया गया।प्रवचन में अनुशासन विषय पर बौद्धिक दिया गया अनुशासन क्षत्रिय के रक्त में और व्यवहार में पीढ़ियों से संचित है जिसका परिणाम हमने हीरक जयंती जयपुर कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व को दिखाया और पूरे विश्व ने उसे देखा और सराहा। मातृ वंदना एवं एजी थारा टाबर… प्रार्थना का आयोजन किया गया।
लगभग 600 स्वयंसेवक प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक शिविर के विभिन्न कार्यक्रमों में अभ्यास के माध्यम से अपने भीतर क्षत्रियोंचित संस्कारों का सृजन कर रहे हैं।