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बीच रास्ते कई बार बंद हुई बस, इंजन में पानी डालकर कराया सफर पूरा
विरोध करने पर कंडक्टर की दादागिरी से भड़के यात्री
सिरोही डिपो की लापरवाही पर उठे सवाल, दोषी ड्राइवर-कंडक्टर और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज
सीधा सवाल।सुमेरपुर/सिरोही।राजस्थान रोडवेज की बदहाल व्यवस्था ने एक बार फिर यात्रियों की जान को खतरे में डाल दिया। उदयपुर से सिरोही की ओर रवाना हुई रोडवेज की एक खटारा बस बीच रास्ते कई बार खराब हो गई, जिससे भीषण गर्मी और अंधेरे में यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। हालत इतनी खराब हो गई कि बस को रास्ते में रोक-रोककर इंजन में पानी डालना पड़ा, तब जाकर किसी तरह सफर आगे बढ़ सका।यात्रियों का आरोप है कि जब बस में सवार लोगों ने बस की खराब हालत को लेकर कंडक्टर से सवाल किए तो उसने जवाब देने के बजाय दादागिरी दिखानी शुरू कर दी। इससे यात्रियों में भारी आक्रोश फैल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस उदयपुर से शाम करीब 5:45 बजे रवाना हुई थी, लेकिन कुछ दूरी तय करने के बाद हीब बस बार-बार बंद होने लगी। रास्ते में कई जगह बस रोकनी पड़ी। इंजन से धुआं और ओवरहीटिंग जैसी समस्या आने लगी, जिसके बाद चालक को सड़क किनारे पानी डालकर बस चालू करनी पड़ी। इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और गुजरात जाने वाले यात्रियों को घंटों परेशान होना पड़ा।
“किस हादसे का इंतजार कर रहा है रोडवेज प्रशासन?”
यात्रियों ने सवाल उठाया कि आखिर सिरोही डिपो कब तक ऐसी जर्जर और मौत बन चुकी बसों को सड़कों पर दौड़ाता रहेगा? लोगों का कहना है कि यदि बीच रास्ते कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
यात्रियों ने आरोप लगाया कि रोडवेज अधिकारी यात्रियों की सुरक्षा से ज्यादा सिर्फ औपचारिकता निभाने में लगे हुए हैं। बसों की फिटनेस जांच केवल कागजों में हो रही है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है।
कंडक्टर की कथित अभद्रता से बढ़ा गुस्सा
बस में मौजूद यात्रियों का कहना है कि जब लोगों ने बस खराब होने की शिकायत उठाई और समय पर गंतव्य तक पहुंचाने की बात कही, तो कंडक्टर ने सहयोग करने के बजाय रौब झाड़ना शुरू कर दिया। इससे यात्रियों का गुस्सा और भड़क उठा। कई यात्रियों ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी जनता से बात करने तक की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं।
सिरोही डिपो के अधिकारियों पर भी उठे सवाल
घटना के बाद अब सिरोही डिपो के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि खराब और जर्जर बसों को बिना जांच के लंबे रूट पर भेजना यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने मांग की है कि:
दोषी ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
सिरोही डिपो के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
खटारा और तकनीकी रूप से खराब बसों को तत्काल रूट से हटाया जाए।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए रोडवेज की बसों की विशेष जांच कराई जाए।
“रोडवेज नहीं, चलता-फिरता खतरा”
यात्रियों का कहना है कि राजस्थान रोडवेज की कई बसें अब परिवहन सेवा कम और चलता-फिरता खतरा ज्यादा बन चुकी हैं। आए दिन बसों के खराब होने, रास्ते में रुकने और यात्रियों को परेशान होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन बैठे हैं।
घटना के बाद यात्रियों में भारी नाराजगी है और लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो रोडवेज प्रशासन के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।