चित्तौड़गढ़ - सैनिक स्कूल में विजय दिवस की 55वीं वर्षगांठ ऐतिहासिक गरिमा, गौरव एवं राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई
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चित्तौड़गढ़ / कपासन - पुलिस थाना एवं ए एन्ट्रीएफ टीम की सयुक्त कार्यवाही मे एक बेलेनो कार, एक मोटर साईकिल से 36 किलोग्राम अफीम डोडा चूरा व 16 ग्राम एमडीएम मौली पाउडर जब्त

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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में विजय दिवस की 55वीं वर्षगांठ अत्यंत गरिमा, अनुशासन, शौर्य एवं देशभक्ति की भावना के साथ बड़े ही भव्य एवं प्रेरणादायी रूप में मनाई गई। यह आयोजन भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय, बीर सैनिकों के अदम्य साहस तथा शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करने हेतु समर्पित रहा। इस अवसर पर विद्यालय के शंकर मेनन सभागार में विशेष सभा का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा, सैन्य परंपरा एवं राष्ट्रसेवा की भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला।


कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि के रूप में तथा भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन पर विद्यालय के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया, उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव एवं प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी चीकुमार द्वारा पारंपरिक सैन्य शिष्टाचार के साथ स्वागत किया गया। विद्यालय के कैडेट्स द्वारा मुख्य अतिथि को भव्य गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि ने सर्वप्रथम विद्यालय परिसर में स्थित स्मृतिका पर पहुंचकर राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया। यह क्षण सभी उपस्थित जनों के लिए अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी रहा।


शंकर मेनन सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कैडेट अंश बिलवाल ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया। इसके पश्चात 1971 के भारत पाक युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति से संबंधित एक प्रेरक लघु डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित सभी जनों को उस ऐतिहासिक विजय के गौरवशाली क्षणों की स्मृति करा दी। विद्यालय के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहे। गणेश वंदना से प्रारंभहोकर देशभक्ति गीतों, समूह नृत्य एवं राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और कैडेट्स की प्रतिभा एवं अनुशासन की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।


मुख्य अतिथि माननीय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने विस्तृत संबोधन में विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 16 दिसंबर 1971 का दिन भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इस दिन भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस, रणनीति एवं शौर्य का परिचय देते हुए पाकिस्तान को पराजित किया और 93000 सैनिकों का आत्मसमर्पण कराकर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई। उन्होंने कहा कि आज भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिनी जाती है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों, यहां तक कि माइनस डिग्री तापमान में भी, राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती है।


उन्होंने कहा कि सैनिक निस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा करते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं और उनका यह बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने फील्ड मार्शल सैम मानेकों, सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल, कर्नल होशियार सिंह सहित अनेक वीर योद्धाओं का स्मरण करते हुए कहा कि इन्हीं महान सेनानायकों के कारण भारत ने यह ऐतिहासिक विजय प्राप्त की।

 दिलावर ने वर्तमान सरकार द्वारा सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के सम्मान के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि राजस्थान सरकार ने सरकारी सेवाओं में पूर्व सैनिकों को अवसर प्रदान कर उनके योगदान को सम्मान दिया है। उन्होंने महाराणा प्रताप की इस पावन धरती को नमन करते हुए सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का आभार व्यक्त किया, जो प्रदेश के नौनिहालों को अनुशासन, नेतृत्व एवं राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित कर रहा है।


उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं से युक्त पद्मिनी हाउस, लैंग्वेज लैब, अत्याधुनिक पुस्तकालय, रोचोटिक लैब, स्पोर्ट्स एरीना, आर्चरी रेंज एवं एयर राइफल शूटिंग रेंज का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी सुविधाएं कैडेट्स के सर्वांगीण विकास एवं उज्वल भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में सात बालिका सैनिक स्कूल खोलने के निर्णय की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि पहला बालिका सैनिक स्कूल बीकानेर में स्थापित किया गया है, जिसके लिए दानदाता थी पूनमचंद राठी द्वारा 108 करोड़ रुपये का योगदान दिया गया है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, राष्ट्रभक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों जैसे विद्यालयों का नामकरण शहीदों के नाम पर करना, कारगिल विजय दिवस पर सामूहिक राष्ट्रगान एवं सूर्य नमस्कार के विश्व रिकॉर्ड तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान की भी जानकारी दी।


विशिष्ट अतिथि कर्नल देवआनंद ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। 1971 की विजय आने वाली पीड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रक्षा मंत्री के प्रयासों से आज महिलाएं भी भारतीय सेना में साहस एवं शौर्य का परचम लहरा रही हैं, जो राष्ट्रीय गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान एकमात्र ऐसा प्रदेश है जहां सैनिकों की दुर्घटना की स्थिति में सरकारी नौकरी का प्रावधान है।


विद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा भूतपूर्व सैनिकों लेफ्टिनेंट जनरल मांधाता सिंह, पीवीएसएम, वाईएसएम, बीएसएम, सूबेदार मेजर श्याम लाल गिल, नायब सूबेदार प्रभु दयाल, सार्जेंट राजेंद्रपुरी गोस्वामी, राइफलमैन सरदार बान पठान, हवलदार नंदलाल व्यावट, सिपाही शंकर लाल शमदानी, हवलदार किशन लाल धाकड, सिपाही कमर अली खान, भूतपूर्व सैनिक ज्ञान सिंह एवं विद्यालय के कर्मचारियों राकेश रामपुरिया, डॉ मंजीत सिंह, बाबूलाल शिवरान, दिव्या राव, जितेन्द्र तिवानी एवम् गोविन्द सिंह को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान का प्रतीक रहा।


कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा विद्यालय में हाल ही में निर्मित पेरेंट्स हॉल, आधुनिक जनरल मांधाता एयर राइफल शूटिंग रेंज एवं ब्रिगेडियर रणशेर तीरंदाजी रेंज का लोकार्पण किया गया, जिससे कैडेट्स को खेलकूद एवं सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में और अधिक अवसर प्राप्त होंगे।


कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को विद्यालय परिवार की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने स्कूल को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जिसे प्राचार्य कर्नल जसरोटिया ने ग्रहण किया। विद्यालय कप्तान कैडेट मयंक विश्वकर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन कैडेट अंश बिलवाल एवं कैडेट प्रियंका द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।


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