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सीधा सवाल। बस्सी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के निर्णय के विरोध में बस्सी ग्रामीण मंडल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। बस्सी ग्रामीण मंडल अध्यक्ष दिनेश सोनी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपकर इस फैसले का विरोध दर्ज कराया।
मंडल अध्यक्ष दिनेश सोनी ने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर नरेगा योजना लागू कर 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई थी। इस योजना से गांवों में जल संरक्षण, ग्रेवल सड़क, जल भराव रोकने जैसे कई विकास कार्य हुए और गरीब व जरूरतमंदों को अपने ही गांव में रोजगार मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार न केवल योजना का नाम बदल रही है, बल्कि इसमें दी जाने वाली राशि में भी कटौती कर रही है। पहले जहां केंद्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत राशि दी जाती थी, अब उसे घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस योजना को हाशिये पर डालना चाहती है।
दिनेश सोनी ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से ही भारत की पहचान है और गांव, गरीब व मजदूरों से जुड़ी इस योजना का नाम बदलना केंद्र सरकार की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने राज्यपाल के माध्यम से भारत सरकार तक मांग पहुंचाने की बात कही।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि फिलहाल पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा के आह्वान पर कांग्रेसजन आम जनता के साथ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा योजना को यथावत रखा जाए और यदि नई योजना लानी है तो किसी भी नाम से लाई जाए, इस पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है।
इस दौरान बस्सी पंचायत अध्यक्ष शीतल नामधराणी, मंडल कार्यकारिणी सदस्य विनोद धोबी, मेहमूद कुरेशी, ओमप्रकाश तेली, इरफान बरकाती, रतन सालवी, रमेश माली, सतीश सुवालका, देवकिशन जाट, गोवर्धन जाट, भानुपताप नेगडिया, आबिद हुसैन, अभिषेक चौधरी, फुरकान अंसारी, रतनलाल माली सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।