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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौडगढ़ द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत आयोजित प्रथम पंक्ति प्रदर्शनों (तिलहन) में सरसो फसल की नवीन उन्नत किस्म आरएच 761 पर पंचायत समिति भैंसरोडगढ़ के गांव शम्भूनाथ जी का खेड़ा में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमे 56 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी, ने कृषको को प्रदर्शन खेत व कृषक पद्धति के खेतो में तुलना करते हुए अन्तर स्पष्ट किया उन्होने प्रदर्शन खेत के पौधो की वृद्धि व शाखाए अधिक तथा फलियों व दानो की संख्या स्थानीय किस्म से अधिक पाई गई, यह किस्म 130-135 दिन में पकती है एवं रेतीली एवं मध्यम भूमि क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, औसत पैदावार 17-20 क्विंटल प्रति हैक्टर, कम एवं मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए एकाधिक प्रतिरोधी किस्म है। इस किस्म में तेल की मात्रा 40.70 प्रतिशत होती है। निरीक्षण के दौरान सरसों की फसल में मोयला कीट का प्रकोप पाया गया। उन्होंने बताया कि मोयला कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए मैलाथियान 5 प्रतिशत चूर्ण की 20 से 25 किलोग्राग मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करे अथवा मैलाथियोंन 50 ईसी की 125 में लीटर मात्रा या डाईमिथोएट 30 ईसी की 875 मिलीलीटर मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से उचित मात्रा में पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। कृषको को डाईमिथोएट 30 ईसी उपलब्ध कराई गई।
केन्द्र के तकनीकी सहायक संजय कुमार धाकड़ ने सरसों की खेती में पौध सरक्षण के बारे में तकनीकी जानकारी पर चर्चा करते हुए उत्पादित बीज को आगामी फसल की बुवाई के लिए भण्डारण कर स्वय एव पडोसी गांवो के अन्य किसानो को बीज के रूप में बेचकर आमदनी में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया।
अन्त में शंकर लाल नाई, सेवानिवृत सहायक कृषि अधिकारी ने प्रशिक्षण में उपस्थित सभी कृषक एवं कृषक महिलाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।