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10 दिवसीय रामकथा का हुआ समापन
सीधा सवाल। चिकारड़ा। लंका युद्ध के बाद श्रीराम ने रावण को मोक्ष प्रदान किया । अधर्म के विनाश के साथ शत्रु के प्रति मर्यादा दिखाते हुए श्रीराम ने रावण का उद्धार भी किया । उक्त बात आकोलागढ़ में आयोजित 10 दिवसीय श्री राम कथा के समापन के अवसर व्यास पिठ पर बिराजित सुश्री पूजा मेनारिया ने कही। वही बताया कि
श्रीराम ने शत्रु होकर भी रावण के गुणों को स्वीकार किया और उसके कल्याण की कामना की।। यह भी कहा कि दंड के साथ दया भी आवश्यक है । श्रीराम द्वारा रावण का उद्धार इसका प्रमाण है।
चौदह वर्षों प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम का अयोध्या में भव्य स्वागत हुआ और अयोध्या नगरी दीपों के साथ भक्ति और उल्लास से राममय हो उठी।
अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य राज्याभिषेक संपन्न हुआ। धर्म, मर्यादा और न्याय के प्रतीक राम ने सिंहासन ग्रहण किया। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के पधारने एवं राज्याभिषेक के साथ ही अयोध्या नगरी में भव्य उत्सव मनाया गया । यहां यह भी बतादे की इससे पूर्व बुधवार को वानर राज बाली का उद्धार प्रसंग सुनाया जिसमे धर्म के मार्ग से भटके बाली को श्री राम ने धर्म का बोध कराया और अपने श्री चरणों में उन्हें मोक्ष प्रदान किया। रामदूत हनुमान ने अपनी अद्भुत बुद्धि और साहस से माता जानकी का पता लगाया माता जानकी को श्री राम का संदेश और अंगूठी सौपकर अपना परिचय दिया। अकेले हनुमान जी ने वाटिका को उजड़ते हुए कई रक्षों का शहर किया इस घटना से लंका में भय का माहौल बना। आयोजकों द्वारा बताया गया कि श्री राम कथा में पिछले 10 दिनों से क्षेत्र के तथा आसपास गांव के हजारों ग्रामीणों ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ लिया ।