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सीधा सवाल। भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा की धरती भक्ति, परंपरा और कला के अद्भुत संगम के लिए जानी जाती है। यहां आस्था केवल मंदिरों और पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कला, शिल्प और नवाचार के रूप में भी प्रकट होती है। ऐसा ही एक अनोखा उदाहरण सामने आया है, जहां मेवाड़ के आराध्य भगवान श्रीसांवरिया सेठ का आधार कार्ड तैयार किया गया है। खास बात यह है कि यह आधार कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी से बना हुआ है, जिस पर बारीक और आकर्षक नक्काशी की गई है।
यह अनूठी कृति भीलवाड़ा जिले के आसींद निवासी स्वर्ण-चांदी कलाकार धनराज सोनी द्वारा तैयार की गई है। धनराज सोनी ने अपनी कला के साथ गहरी भक्ति को जोड़ते हुए यह चांदी का आधार कार्ड बनाया है, जो इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
धनराज सोनी द्वारा तैयार किया गया यह कार्ड बिल्कुल भारत सरकार द्वारा जारी आधार कार्ड की तर्ज पर बनाया गया है। कार्ड चांदी के पतले पत्ते से निर्मित है, जिस पर अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी की गई है। पहली नजर में यह कार्ड देखने पर हूबहू असली आधार कार्ड जैसा प्रतीत होता है, लेकिन नजदीक से देखने पर इसमें की गई कलाकारी और भक्ति भाव दर्शक को भाव-विभोर कर देता है।
इस चांदी के आधार कार्ड पर भारत का राजचिह्न अशोक स्तंभ, आधार कार्ड की पारंपरिक संरचना और भगवान श्रीसांवरिया सेठ की मनमोहक छवि को उकेरा गया है। कलाकार ने हर छोटे-बड़े विवरण का विशेष ध्यान रखा है, ताकि यह कार्ड पूरी तरह वास्तविक लगे।
इस अनोखे आधार कार्ड पर भगवान श्रीसांवरिया सेठ का नाम, लिंग (पुरुष) और जन्म तिथि के रूप में ‘भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व’ को दर्शाया गया है, जिसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही कार्ड पर नाम-पता और आधार नंबर भी कलात्मक शैली में अंकित किया गया है, जो इसे और अधिक खास बनाता है।
कार्ड के निचले हिस्से में लिखा गया भावपूर्ण संदेश “मेरे सरकार मेरी पहचान” भक्त और भगवान के बीच के अटूट रिश्ते को दर्शाता है। यह पंक्ति बताती है कि एक भक्त के जीवन में उसके आराध्य ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होते हैं।
स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने बताया कि यह चांदी का आधार कार्ड क्षेत्र के एक श्रद्धालु ग्राहक की विशेष मांग पर तैयार किया गया है। ग्राहक की भावना थी कि भगवान श्रीसांवरिया सेठ के प्रति अपनी श्रद्धा को कुछ अलग और स्थायी रूप में व्यक्त किया जाए। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कृति बनाई।
धनराज सोनी के अनुसार, भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां श्रद्धा को कला के माध्यम से जीवंत किया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले भी भगवान के लिए चांदी के सिंहासन, मुकुट, आभूषण और प्रतीक चिन्ह बनाए जाते रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड के रूप में यह प्रयोग अपने आप में अलग और नया है।
भगवान श्रीसांवरिया सेठ का यह चांदी का आधार कार्ड सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और आम लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कोई इसे भक्ति की आधुनिक अभिव्यक्ति बता रहा है, तो कोई इसे राजस्थानी शिल्पकला की बेजोड़ मिसाल मान रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी यह विषय तेजी से फैल रहा है।
लोगों का कहना है कि यह कृति दिखाती है कि आधुनिक पहचान प्रणाली और परंपरागत आस्था कैसे एक साथ जुड़ सकती हैं। यह न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता और नवाचार को भी दर्शाता है। कुल मिलाकर, भगवान श्रीसांवरिया सेठ का चांदी से बना आधार कार्ड आस्था, कला और कल्पनाशीलता का अनूठा उदाहरण है। मेवाड़ की इस अनोखी पेशकश ने एक बार फिर राजस्थान की भक्ति परंपरा और कलाकारों की सृजनशीलता को नई पहचान दी है।