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छात्र संघर्ष की सूचना पर पहुंची पुलिस और अधिकारी
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार में संचालित मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है। जम्मू कश्मीर के छात्रों के साथ अन्य छात्रों को बीएससी नर्सिंग में बिना मान्यता के भारतीय सेना की छात्रवृत्ति योजना में प्रवेश देने और उसके बाद मान्यता को लेकर छात्रों के निलंबन से शुरू हुआ विवाद छात्र संघर्ष में परिवर्तित हो गया। हालात इस कदर बिगड़ गए की पुलिस के आला अधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। हालांकि मूल विवाद को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन यूनिवर्सिटी परिसर में चल रहे विवाद से जुड़े वीडियो सामने आए हैं। इससे लगने लगा है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बड़ा छात्र संघर्ष चल रहा है जिससे यहां पढ़ रहे अलग-अलग राज्यों के छात्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है और कानून व्यवस्था के लिए अधिकारी मौके पर मौजूद है। वही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी भेजा गया है।
धरने से शुरू हुआ विवाद बदला छात्र संघर्ष में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते लगभग एक सप्ताह से बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता नहीं होने के बावजूद केंद्र सरकार की विशेष छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत कश्मीरी छात्रों सहित अन्य छात्रों को प्रवेश देने से विवाद शुरू हुआ था। बीते 5 दिनों से मान्यता की जानकारी को लेकर छात्र यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे इसी बीच प्रबंधन ने छात्रों के प्रदर्शन को दबाने के लिए 30 कश्मीरी विद्यार्थियों सहित कुल 34 छात्रों को निष्कासित कर दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और मंगलवार सुबह से ही छात्रों ने विरोध को तेज करते हुए मैस और मुख्य द्वार को बंद कर दिया। जिससे सुबह बिहार से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्र जब खाना खाने पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया इससे छात्र आमने-सामने हो गए। सूचना मिलने पर प्रबंधन ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी और मामले को शांत करवाया इसी बीच शाम को फिर विवाद गहरा गया और अन्य क्षेत्रों के छात्रों को भी खाना खाने से रोका गया। इसके चलते विवाद और बढ़ गया। विवाद बढ़ने पर जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है। वही पथराव की जानकारी भी सामने आई है लेकिन इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं हो पाई है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस उप अधीक्षक शिवन्या सिंह तहसीलदार परिसर में मौजूद थे जिनसे बात करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
यूनिवर्सिटी का विवादों से पुराना नाता
मेवाड़ यूनिवर्सिटी का विवादों से पुराना नाता है। पूर्व में भी जम्मू कश्मीर के छात्रों को लेकर छात्रवृत्ति और विवाद के मामले में यह यूनिवर्सिटी चर्चाओं में रही है। वही फर्जी डिग्री के मामले में जांच में भी यूनिवर्सिटी के एक कार्मिक की भूमिका सामने आई थी हालांकि उसके बाद आगे की जांच नहीं हो पाई लेकिन अब एक बार फिर मेवाड़ यूनिवर्सिटी विवादों में है।
मान्यता नहीं तो कैसे दे दिया प्रवेश....!
बीएससी नर्सिंग में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ यह विवाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रदेश की सरकार से एनओसी लेने के बाद राजस्थान नर्सिंग काउंसिल इंडियन नर्सिंग काउंसिल जैसी संस्थाओं से मान्यता प्राप्त करनी होती है उसके पश्चात यूनिवर्सिटी मान्यता के आधार पर यह पाठ्यक्रम संचालित कर सकती है। लेकिन मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पास इस पाठ्यक्रम के लिए कोई वैधानिक मान्यता नहीं है इसके बावजूद केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना में प्रवेश देना यूनिवर्सिटी पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। साल 2022 से इस पाठ्यक्रम में पंजीकृत विद्यार्थी अपनी डिग्री पूरी कर जब डिग्री के लिए मांग कर रहे हैं तो उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है जिसे प्रबंधन दबाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का इस यूनिवर्सिटी को अधिकार किसने दिया है यह भी एक बड़ा सवाल है। प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से प्रवेश देने के बाद अब छात्रों के का भविष्य अंधकार में हो गया है। और इसी के चलते छात्रों में आक्रोश है।
भजनलाल सरकार नहीं दे रही मान्यता
इस मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर आलोक मिश्रा का बयान सामने आया है जिसमें उनका कहना है कि प्रदेश की भजनलाल सरकार मेवाड़ यूनिवर्सिटी को मानता नहीं दे रही है। कोर्ट के आदेश के आधार पर छात्रों को प्रवेश दिया गया है। लेकिन जानकारी में यह भी सामने आया है कि न्यायालय ने सरकार को बाध्य नही किया है कि इस यूनिवर्सिटी को मान्यता दे दी जाए। इससे साफ है कि पहले प्रवेश देकर बाद में मान्यता लेने की योजना प्रबंधन द्वारा बनाई गई थी लेकिन अब सरकार इसे मान्यता नहीं दे रही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए प्रबंधन छात्रों के आक्रोश को दबाने का प्रयास कर रहा है जिससे छात्रों का आक्रोश और भड़के और सरकार को मान्यता देने के लिए मजबूर होना पड़े। छात्र हित के लिए निर्णय लेने की बात कहने वाली यूनिवर्सिटी द्वारा बिना मान्यता के प्रवेश देना ही नियम विरुद्ध है इसके बावजूद सरकार पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे है।
यूनिवर्सिटी के रसूख के आगे किरोड़ी भी करवा चुके है किरकिरी
लगातार विवादों में रहने वाली मेवाड़ यूनिवर्सिटी के मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ किरोडी लाल मीणा भी अपनी किरकिरी करवा चुके हैं। पूर्व में फर्जी डिग्री की शिकायत की जांच को लेकर मंत्री किरोड़ी यूनिवर्सिटी पहुंचे थे और मीडिया को दिए अधिकृत बयान में उन्होंने कहा था कि कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम में यूनिवर्सिटी फर्जी तरीके से डिग्री दे रही है जिसकी वह जयपुर जाकर जांच करवाएंगे। लेकिन उसके बाद कोई जानकारी सामने नहीं आई लेकिन इसे लेकर वाइस चांसलर डॉक्टर आलोक मिश्रा ने कहा है कि वह गलत तरीके से सही जगह पर घुस गए थे जिसे लेकर उन्होंने अपनी गलती भी स्वीकार की है।