views
चंदेरिया के चंद्रनगर मामले में जांच जारी, भू माफिया लगातार लग रहा लोगों को चूना
सीधा सवाल। चितौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में स्थित अवैध चंद्रनगर के मामले में भले ही प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। और भू माफिया द्वारा अवैध रूप से कृषि भूमि को आवासीय कॉलोनी बताकर बेचने के मामले में नियम अनुसार कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। ऐसे में सम्भावना है कि जल्द ही इस पूरे मामले में नियम अनुसार कार्रवाई करते हुए भूमि को राजकीय श्रेणी में विला नाम घोषित किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद इस कॉलोनी से जुड़े भू माफिया के हौसले बुलंद है। चंद्रनगर की तरह ही जिले के अन्य क्षेत्रों में इसी तरह से अवैध कालोनी काटने का खेल शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि जिलेभर में अलग-अलग क्षेत्र में कृषि भूमि को लॉटरी के माध्यम से बेचे जाने के मामले में एक गिरोह सक्रिय है। जिले के अलग-अलग स्थान में यह या दो स्थानीय लोगों को भागीदार बनकर यह गिरोह पूरे जिले में सक्रिय हो रहा है। ऐसी स्थिति में इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई और पूरी जांच की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। क्योंकि अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जिले में ऐसे कितने चंद्र नगर है जिनके नाम पर सपनों के आशियाने के ख्वाब दिखाकर सरकार और ग्राहक दोनों को चूना लगाया जा रहा है।
कागज में कुछ और जमीन पर कुछ और जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत
इस पूरे मामले में लोगों को लॉटरी का झांसा देकर महंगे इनाम और सस्ती जमीन के फेर में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के साथ-साथ इन्हें मदद करने वाले लोगों को भी सामने लाने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। एक सामान्य भूमि रजिस्ट्री के मामले में मौका रिपोर्ट मौका स्थिति पर निर्माण जैसी अलग-अलग रिपोर्ट होने के बाद भूमि की रजिस्ट्री होती है। लेकिन मौके पर कृषि भूमि पर कोई प्लाट की नंबरिंग को लेकर केवल कागजी आधार पर कृषि भूमि का हक बंटवारा रजिस्ट्री करवाने के मामले में रजिस्ट्री बिना सरकारी मिली भगत के संभव नहीं है। मौका रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी और कार्मिक आखिर बिना मौके पर गए मौका रिपोर्ट पर हस्ताक्षर क्यों कर रहे थे, और यदि उन्होंने धरातल पर मौका देखा है तो फिर ऐसे तथ्यों को नजर अंदाज करने के पीछे क्या कारण है यह भी एक बड़ा सवाल है।
इसलिए बनाये नियम फिर भी मिली भगत से बाईपास
मौके पर निर्माण होने सरकारी भूमि होने नाल होने या किसी और समस्या का भाव होने की स्थिति में सरकार कार्रवाई कर सके और सरकार को पूरा राजस्व मिले इसलिए रजिस्ट्री के संदर्भ में नियम बनाए गए है। आमजन को फायदा करवाने और सरकार को राजस्व के नुकसान से बचाने के लिए अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। अब ऐसी स्थिति में यदि 400 से अधिक आवासीय भूखंड बता कर लॉटरी के जरिए बेचने के मामले में कृषि भूमि की हक बंटवारे की रजिस्ट्री हो रही है तो यह सवाल खड़ा होता है कि गंगरार में होने वाली भूमि रजिस्ट्री को लेकर भौतिक सत्यापन रिपोर्ट कितनी सही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री अधिकारी को झूठे तथ्य प्रस्तुत करते हुए मौके पर हुए निर्माण या अन्य मामलों में राजस्व को होने वाली आय का नुकसान करते हुए अधीनस्थ कार्मिकों द्वारा अन्य रजिस्ट्री मामले में भी इस प्रकार की कारगुजारी की गई हो। और चंद्र नगर केवल एक नाम हो भूमि रजिस्ट्री के विभिन्न मामले में राजस्व को आय होने के तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए ऐसी रिपोर्ट पेश की गई हो जिनमे राजस्व का नुकसान हुआ हो। सूत्रों का कहना है कि ऐसे कहीं मामले हैं जहां तथ्य दरकिनार करते हुए राजस्व को नुकसान किया गया है।
जिले भर में चल रहा खेल नाम अनेक माफिया एक
सूत्रों की माने तो यह पूरा एक संगठित गिरोह है। जिसे चित्तौड़गढ़ जिले में अलग-अलग पद पर पदस्थापित रहे एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। यह गिरोह चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय के अतिरिक्त बस्सी निंबाहेड़ा और गंगरार क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि चंद्रनगर की तरह ही जिले के अलग-अलग स्थान पर कृषि भूमि के विक्रय अनुबंध कर प्रस्तावित कॉलोनी के लिए किस्तों पर आधारित भूखंड बेचे जाने के पर्चे भी छपवा कर वितरित किए जा चुके हैं। वही एक मामले में तो लोगों से दो से अधिक किस्ते भूखंड के नाम पर ली जा चुकी है। अब ऐसे में इस प्रकार की स्थितियां यूआईटी नगर पालिका ग्राम पंचायत नगर परिषद जैसी निकायों के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रही है। और यहां यह भी बता दे की वर्तमान में चुनाव नहीं होने के चलते सभी निकायों के लिए जिम्मेदार सीधे तौर पर अलग-अलग स्तर के प्रशासनिक अधिकारी हैं। चाहे ग्राम पंचायत हो पंचायत समिति हो नगर पालिका हो या नगर परिषद या फिर यूआईटी प्रत्येक जगह जहां चुनाव नहीं हुए हैं वहां कार्यभार प्रशासनिक अधिकारियों के पास है। ऐसे में यह स्थिति सरकार द्वारा सरकार को ही झांसा देने जैसी प्रतीत हो रही है।