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सीधा सवाल। कपासन। मंत्रालयिक कर्मचारियों ने ग्राम सभाओं का बहिष्कार किया। उन्होंने पंचायती राज अधिनियम में निर्धारित दायित्वों के विपरीत ग्राम सभाएं करवाने के विरोध में यह निर्णय लिया। इस संबंध में उन्होंने एक ज्ञापन भी सौंपा है।पंचायत समिति के समस्त पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने शुक्रवार 20 मार्च को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में भाग न लेने का फैसला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अवैधानिक रूप से अलिखित दायित्व सौंपे जा रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, शासन सचिव और आयुक्त के नाम विकास अधिकारी मुकेश पोरवाल को ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में बताया गया कि पिछले कुछ समय से चल रही समानांतर अव्यवस्था ने पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर कर दिया है और विभाग में अन्य वर्गों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है। विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभाओं सहित महत्वपूर्ण अवसरों पर ग्राम विकास अधिकारियों के आंदोलन पर चले जाने की स्थिति में उनके पदीय दायित्व जबरन मंत्रालयिक संवर्ग पर थोप दिए जाते हैं।प्रदेश उपाध्यक्ष माधव लाल नायक ने कहा कि संगठन द्वारा बार बार सरकार के हर स्तर पर ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद भी किसी विशेष संवर्ग के दबाव में पंचायती राज विभाग द्वारा कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। जब दूसरा संवर्ग काम बंद करके सरकार पर दबाव बनाता हैं। तभी पंचायती राज विभाग अस्थाई व्यवस्था के तहत कनिष्ठ लिपिकों को वे कार्य सौंप देता है, जो अधिनियम/नियमों के तहत दूसरे संवर्ग के कर्मचारियों द्वारा किए जाने चाहिए।इस अवसर उपशाखा कपासन के संरक्षक कैलाश चंद्र गर्ग ने बताया कि इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष अनिता विजयवर्गीय, शाखा अध्यक्ष माधव लाल नायक, पूर्व अध्यक्ष देशबंधु जोशी, श्याम लाल बैरवा, कैलाश चंद्र जाट, लोकेश गौड़, लक्ष्मी लाल जाट, देवेंद्र प्रजापत, सुरेंद्र विजय, गायत्री बैरागी, प्रकाश गर्ग, विष्णु गिरी गोस्वामी, जितेंद्र कुमार भट्ट, बृजेश जैसवाल, ललिता शर्मा, किशन जाट, आशीष शर्मा और आशीष त्रिपाठी सहित कई अन्य कर्मचारी मौजूद थे।