सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। आज के युग में खेलों को लेकर लोगों और खास कर युवा पीढ़ी का जुनून कम ही देखने को मिलता है। वहीं 40 की उम्र पार करने के बाद लोग व्यवसाय एवं परिवार में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन चित्तौड़गढ़ निवासी एक 45 साल के पृथ्वीराज खटीक में मैराथन दौड़ के प्रति जुनून देखते ही बनता है। पृथ्वीराज अब तक देश विभिन्न राज्य एवं शहरों में आयोजित करीब 50 मैराथन में भाग ले चुके हैं। खुद को फिट रखने के लिए प्रतिदिन चित्तौड़ दुर्ग की पहाड़ी क्षेत्र में 13 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं, जिससे कि खुद को फिट रख कर मैराथन में भाग ले सके। मूलतः चित्तौड़गढ़ शहर के खटीक मोहल्ले में रहने वाले पृथ्वीराज खटीक ने करीब 12 वर्ष पूर्व कुंभलगढ़ मैराथन में भाग लिया था। इसके बाद उनका मैराथन को लेकर जुनून शुरू हो गया। पृथ्वीराज को देश में कहीं किसी भी राज्य में मैराथन की सूचना मिलती है तो वे इसमें भाग लेने के लिए चले जाते हैं। लेकिन उसके लिए पहले तैयारी पूरी करते हैं, जिससे मैराथन को बीच में नहीं छोड़ सके। मैराथन के लिए खुद को फिट रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। इसके लिए चित्तौड़ के ऐतिहासिक दुर्ग पर प्रतिदिन चढ़ाई करते हैं। यह चढ़ाई वाला रास्ता होकर करीब 13 किलोमीटर की रनिंग प्रतिदिन हो जाती है। इससे वह मैराथन के लिए खुद को तैयार रखते हैं। पेशे से होमगार्ड होकर भी पृथ्वीराज अपने कार्य के साथ मैराथन दौड़ के लिए पूरा समय निकालते हैं और युवाओं के लिए खेलों में आगे बढ़ाने को लेकर हौंसला अफजाई करते हैं। पृथ्वीराज का कहना है कि युवा मोबाइल छोड़ रनिंग करें। स्टेडियम में आए और खेलों पर ध्यान दें तथा खुद को फिट रखें। अपने बच्चों को भी स्टेडियम लेकर आए और मोबाइल से दूर रखें।
मैराथन के धावक पृथ्वीराज ने बताया कि उनका लक्ष्य 70 मैराथन दौड़ पूरा करने का है। जब शुरुआत की तब सोचा नहीं था कि 50 मैराथन भी पूरी हो पाएगी। अब तक वे कई प्रतिष्ठित मैराथन दौड़ में भाग ले चुके हैं। पिछले 12 साल की अवधि में 50 मैराथन पूरी कर चुके हैं, जिसमें 42 किलोमीटर लंबी मैराथन भी शामिल है। वह अब तक दिल्ली, मुंबई सहित देश के करीब आठ राज्यों के बड़े शहरों में हुई मैराथन पूरी कर चुके हैं। इंदौर में हुई मैराथन में 700 धावकों में उनका 10वां नंबर रहा था। अब तक वह सर्वाधिक 42 किलोमीटर की मैराथन तीन बार जयपुर, दिल्ली व मुंबई में 3.15 घंटे में पूरी कर चुके हैं। धावक के रूप में उनकी पहचान ऐसी बन गई है कि पैर रुकते ही नहीं है। इसके साथ सभी को फिट इंडिया का संदेश भी दे रहे हैं, जिससे लोग तनाव भरी जिंदगी में स्वस्थ रहें।
टीवी देखते लगा मैराथन का शौक
पृथ्वीराज शुरू से ही खेलों में व्यस्त रहे हैं। बचपन में पहलवानी का शौक था लेकिन हाइड अधिक होने से पहलवानी छोड़ने पड़ी और क्रिकेट खेलने लगे। करीब 13-14 साल पहले टीवी पर क्रिकेट मैच देखते समय एक चैनल पर मुंबई स्टैंडर्ड चार्ज मैराथन का लाइव देखा। इस मैराथन को सड़क किनारे हजारों लोग देख रहे थे तो सैकड़ो लोग दौड़ रहे थे। बस यही से दौड़ लगाने का जुनून चढ़ गया।
400 मीटर में ही आ गई थी थकान लेकिन हिम्मत नहीं हारी
पृथ्वीराज ने बताया कि वह शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम में पहुंचे तथा दौड़ शुरू की। लेकिन 400 मीटर का एक राउंड करते ही थकान आ गई और हांफने लगा। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे अभ्यास किया और दूरी को भी बढ़ाया। अब स्थिति है कि 42 किलोमीटर की दूरी भी सवा तीन घंटे में पूरी कर रहे हैं। प्रतिदिन चित्तौड़ दुर्ग पर तो जाते ही है। पहली बार 2014 में कुंभलगढ़ दुर्ग पर मैराथन में भाग लिया था। दीवारों की सीढ़िया पर सात से आठ किलोमीटर दौड़ने से हौंसला बढ़ा। इसके बाद माउंट आबू घाट में 22 किलोमीटर की दौड़ लगा दी। इसके अलावा वह समय-समय पर शहर से कई दूर स्थान पर स्थित धार्मिक स्थलों तक मैराथन दौड़ कर चुके हैं। चित्तौड़गढ़ से सांवलियाजी तक करीब 45 किलोमीटर भी वह मैराथन पूरी कर चुके हैं।