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पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत का दौरा बना राजनीतिक और सामाजिक संदेशों का मंच
सीधा सवाल।जयपुर/सुमेरपुर।
राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत का 28 और 29 मई का प्रस्तावित दौरा अब केवल सरकारी यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे धर्म, संगठन और ग्रामीण राजनीति को साधने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। जारी कार्यक्रम के अनुसार मंत्री दो दिनों में दौसा, करौली, सुमेरपुर, बालोतरा, पचपदरा और बाड़मेर तक कई महत्वपूर्ण आयोजनों में भाग लेंगे।यात्रा कार्यक्रम में सबसे खास बात यह है कि मंत्री धार्मिक आयोजनों से लेकर गौशाला संचालकों की समीक्षा बैठक, “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” और बड़े सामाजिक कार्यक्रमों में लगातार मौजूद रहेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दौरा आगामी पंचायत और ग्रामीण समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। 28 मई को मंत्री जयपुर से दौसा और करौली पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ में भाग लेंगे। इसके बाद गौशाला संचालकों और पशुपालन विभाग की बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक में शामिल होंगे। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में सरकार ने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए बड़े बजट प्रावधानों की घोषणा की है। यात्रा का दूसरा दिन पश्चिमी राजस्थान पर केंद्रित रहेगा। मंत्री सुमेरपुर से मुण्डारा पहुंचकर वायुण्डा माता मंदिर के वार्षिकोत्सव में शामिल होंगे। इसके बाद बालोतरा में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के कार्यक्रमों में भाग लेंगे। शाम को पचपदरा में आयोजित “हेल्थ केयर अवॉर्ड” समारोह में मौजूद रहेंगे और रात को बाड़मेर प्रवास करेंगे।राजनीतिक गलियारों में इस पूरे दौरे को केवल विभागीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की पकड़ मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। खासकर गौशालाओं, पशुपालकों और धार्मिक आयोजनों के जरिए भाजपा ग्रामीण वोट बैंक को साधने की कोशिश में नजर आ रही है।सूत्रों के अनुसार मंत्री के कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों की बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है। हाल के महीनों में मंत्री जोराराम कुमावत लगातार पशुपालन, गौसेवा और ग्रामीण योजनाओं को लेकर सक्रिय दिखाई दिए हैं।