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बीच रास्ते बार-बार बंद हुई खटारा बस, इंजन में पानी डालकर कराया सफर पूरा
कंडक्टर ने सांसद का नाम लेकर यात्रियों को डराया, पत्रकार ने मोबाइल में कैद किया पूरा घटनाक्रम
सिरोही डिपो की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, यात्रियों में भारी आक्रोश
पुखराज कुमावत /सिरोही।राजस्थान में भजनलाल सरकार भले ही परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। उदयपुर से सिरोही की ओर जा रही राजस्थान रोडवेज की एक जर्जर बस बीच रास्ते कई बार खराब हो गई। हालात इतने खराब थे कि चालक को सड़क किनारे बस रोक-रोककर इंजन में पानी डालना पड़ा, तब जाकर बस किसी तरह आगे बढ़ सकी।भीषण गर्मी, अंधेरा और घंटों की देरी से परेशान यात्रियों का गुस्सा उस समय और भड़क उठा जब बस में मौजूद कंडक्टर ने सवाल पूछने वाले यात्रियों को कथित रूप से सांसद लुंबाराम का नाम लेकर डराने और रौब झाड़ने की कोशिश की। घटना के दौरान बस में मौजूद एक पत्रकार ने पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
“रोडवेज बस या चलता-फिरता कबाड़?”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस उदयपुर से शाम करीब 5:45 बजे रवाना हुई थी, लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद तकनीकी खराबी सामने आने लगी। रास्ते में कई बार बस बंद हुई और चालक को मजबूरी में इंजन में पानी डालकर बस स्टार्ट करनी पड़ी।
यात्रियों का कहना है कि बस की हालत इतनी खराब थी कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। महिलाएं, बुजुर्ग और गुजरात जाने वाले यात्री घंटों तक परेशान होते रहे, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों ने कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई।
सवाल पूछने पर “दादागिरी” का आरोप
बस में मौजूद यात्रियों ने आरोप लगाया कि जब लोगों ने बस की खराब हालत और देरी को लेकर कंडक्टर से सवाल किए तो उसने समाधान देने के बजाय अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, कथित रूप से सांसद लुंबाराम का नाम लेकर यात्रियों पर दबाव बनाने की कोशिश भी की गई।
इस व्यवहार से यात्रियों में भारी नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि जनता की सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी निभाने के बजाय रोडवेज कर्मचारी सत्ता का डर दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाह रहे थे।
पत्रकार ने मोबाइल में कैद किया पूरा मामला
घटना के दौरान बस में सफर कर रहे एक पत्रकार ने खराब बस, रास्ते में पानी डालने की मजबूरी और यात्रियों की परेशानी सहित पूरे घटनाक्रम को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सामने आने के बाद अब सिरोही डिपो और रोडवेज प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिरोही डिपो पर उठे बड़े सवाल
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि आखिर कब तक खटारा और तकनीकी रूप से फेल बसों को लंबी दूरी के रूट पर दौड़ाया जाता रहेगा? लोगों ने आरोप लगाया कि रोडवेज की फिटनेस जांच केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
यात्रियों ने मांग की है कि:
दोषी ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सांसद का नाम लेकर दबाव बनाने के आरोपों की जांच हो।
सिरोही डिपो के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
सभी जर्जर बसों की विशेष तकनीकी जांच कर उन्हें तुरंत रूट से हटाया जाए।
“जनता की जान से खिलवाड़ बंद हो”
घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रोडवेज व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
जनता ने चेतावनी दी है कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो रोडवेज प्रशासन के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।