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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़।
राजकीय कन्या महाविद्यालय में आईक्यूएसी, एनएसएस एवं इतिहास संकाय के संयुक्त तत्त्वावधान में समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गौतम कुमार कूकड़ा ने की।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. कूकड़ा ने वैदिक काल की विदुषी नारियों गार्गी, मैत्रेयी, घोषा एवं लोपामुद्रा के वैदुष्य का उल्लेख करते हुए मध्यकाल में महिला शिक्षा की दुर्दशा के कारणों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने आधुनिक काल में सावित्रीबाई फुले द्वारा महिला शिक्षा के क्षेत्र में किए गए संघर्षों एवं उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सी. एल. महावर ने सावित्रीबाई फुले के शिक्षा, नारी उत्थान एवं सामाजिक सुधार आंदोलन में दिए गए योगदान पर विचार व्यक्त किए। इतिहास संकाय की विभागाध्यक्ष शंकर मीना ने भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जीवन, कृतित्व एवं सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. इरफान अहमद ने कविता पाठ के माध्यम से सामाजिक चेतना का संदेश दिया। कार्यक्रम में छात्रा गौरी शर्मा एवं सुल्ताना बी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए सावित्रीबाई फुले को नारी शिक्षा की प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में सामाजिक समानता, शिक्षा के महत्व एवं महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। मंच संचालन एनएसएस प्रभारी डॉ. गोपाल लाल जाट ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति कुमारी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. लोकेश जसोरिया, रेखा मेहता, डॉ. अंजू चौहान, जयश्री कुदाल, रिंकी गुप्ता, डॉ. श्यामसुंदर पारीक, डॉ. प्रीतेश राणा, दिव्या चारण, वंदना शर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।