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सीधा सवाल। कपासन। "शोर्टकट के चक्कर में कई व्यक्ति अपनी गाढी कमाई खो बैठे हैं।" ऐसे विचार स्थानीय रवीन्द्रनाथ टैगोर महाविद्यालय के अर्थशास्त्र, बैंकिंग एवं शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित विश्व निवेश सप्ताह के तहत आयोजित इन्वेस्टमेंट अवेयरनेस प्रोग्राम में एनआईआईटी, जोधपुर के निदेशक व सेबी के रिसोर्स पर्सन डॉ.
मुकेश बंसल ने कहे। डॉ. बंसल ने निवेश जागरूकता पर विचार रखते हुए कहा कि रातोंरात करोडपति बनने या 2 वर्ष में दुगुना धन करने के लालच में कई व्यक्ति चिटफण्ड कम्पनियों में अपना पैसा इन्वेस्ट कर देते हैं एवं वह चिटफण्ड कम्पनियां लोगों की गाढी कमाई का पैसा लेकर फरार हो जाती है। अतः निवेश से पहले रखे पता हर बात का, तभी खुलेगा आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता, जागरूक निवेश यानि सुरक्षित निवेश। भारत सरकार के नियामक संस्थान सेबी एवं बीएसई निवेशक जागरूकता निधि के संयुक्त अभियान "विश्व निवेश सप्ताह 2026" के तहत डॉ. बंसल ने बताया कि भारत गरीबों का देश होते हुए भी बचत स्तर उच्च होने के कारण विश्व में बढती मंदी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पडता जहां मुद्रा वर्तमान आर्थिक तंत्र का जीवन रक्त है, वहीं बचत इस घोर कलयुग में बुढापे का तीसरा पुत्र है। व्यक्ति को अपनी पहली कमाई से ही बचत करने की आदत डालनी चाहिये। साथ ही बैंक में संयुक्त खाता खोलने के साथ उत्तराधिकारी का नाम अवश्य लिखना चाहिये। आधुनिक भौतिकवादी युग में बचत ही बुढापे का सच्चा सहारा है, अतः कमाई का पहला खर्च हो बचत।
महाविद्यालय अकादमिक निदेशक शिवनारायण शर्मा ने डॉ. बंसल का स्वागत करते हुए कहा कि व्यक्ति को निवेश करते समय कंपनियों की वैधता की जानकारी अवश्य कर लेनी चाहिये ताकि अपनी मेहनत की गूढ कमाई सुरक्षित रह सके। उन कंपनियों से बचना चाहिये जो प्रलोभन देकर अधिक ब्याज का झांसा देकर लूटती है।
कार्यक्रम में उपाचार्य एवं अर्थशास्त्री डॉ. ओ. पी. सुखवाल ने मुद्रा की गति के वर्तमान प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुद्रा वह धुरी है जिसके चारों ओर अर्थ तंत्र चक्कर लगाता है। जहां मनुष्य ने अपनी लेनदेन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मुद्रा का आविष्कार किया वही मुद्रा आज मनुष्य को अपना दास बनाकर अपने पीछे दौडा रही है। एनएसएस एवं आरआरसी प्रभारी एच एल अहीर ने डॉ. मुकेश बंसल का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा काल में युवा अपने फाइनेंसियल मेनेजमेंट को बखूबी सीख ले तो जीवन में कभी परेशानी नहीं होगी। विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों, शिक्षकों ने इस सेमीनार से ज्ञानवर्धन किया।