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सीधा सवाल। कपासन। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नगर पालिका बोर्ड का पाँच वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो गया। बोर्ड सदस्यों ने भले ही समारोहपूर्वक विदाई ली हो, लेकिन नगर कांग्रेस कमेटी कपासन इसे कपासन के लिए विकास का नहीं, बल्कि विनाश, कुप्रबंधन और अवसरों की संगठित हत्या का काल मानती है।प्रदेश कांग्रेस सचिव डॉ. ललित बोरीवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रमोद मोदी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश चास्टा, नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं एडवोकेट पवन कुमार शर्मा, बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष रहीं कन्या देवी सोनी ने संयुक्त रूप से कहा कि भाजपा शासित बोर्ड ने अपने पूरे कार्यकाल में कपासन की जनता के साथ विश्वासघात किया है। यह बोर्ड राज्य एवं केंद्र सरकार से विकास के लिए कोई ठोस योजना अथवा पर्याप्त बजट प्राप्त करने में विफल रहा, जो उसकी राजनैतिक एवं प्रशासनिक अक्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।नेताओं ने कहा कि नगर में जो भी तथा कथित विकास कार्य हुए, वे किसी सरकारी योजना के अंतर्गत नहीं, बल्कि नगर पालिका की सार्वजनिक संपत्तियों विशेषकर कीमती जमीनों की नीलामी कर प्राप्त राशि से किए गए। इस प्रक्रिया में नगर की मूल्यवान संपत्तियों को औने पौने दामों में बेचा गया। जिससे नगर के दीर्घकालिक हितों को गंभीर नुकसान पहुँचा।यह भी तथ्य है कि जनता के धन का उपयोग मूलभूत सुविधाओं के लिए नहीं किया गया। इसके विपरीत, चौराहों पर महँगी मूर्तियों, पार्कों में अत्यधिक और अनावश्यक लाइटिंग तथा सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि बेरोजगारी, जर्जर सड़कें, गंदगी, पेयजल संकट और जल निकासी जैसी समस्याएँ जस की तस बनी रहीं।प्रदेश कांग्रेस सचिव डॉ. ललित बोरीवाल ने कहा कि यह कार्यकाल नगर पालिका के इतिहास का सबसे विफल और जन विरोधी दौर रहा। पिछले दो वर्षों से राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद कपासन के विकास के लिए राज्य अथवा केंद्र से प्राप्त बजट और उसके उपयोग का कोई स्पष्ट लेखा जोखा जनता के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।उन्होंने यह भी कहा कि नगर की सड़कें अत्यंत खराब स्थिति में हैं।नालियों की नियमित सफाई नहीं हुई, और मरम्मत कार्य भी न्यूनतम स्तर पर किए गए। पुराने पार्कों को तोड़कर तथाकथित लाइट हाउस का निर्माण किया गया। जिस पर भारी व्यय हुआ, परंतु आम जनता को इसका कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिला। चौराहों पर मूर्तियों के स्थान चयन में भी यातायात व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा गया। जिससे नागरिकों को असुविधा हुई।डॉ. बोरीवाल ने दशहरा मेले के आयोजन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें लाखों रुपये की बंदरबांट हुई और जनता को चूना लगाया गया।पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश चास्टा ने कहा कि पुराने नेहरू पार्क को उजाड़कर करोड़ों रुपये की सब्जी मंडी बना दी गई। जबकि यदि यह मंडी किसी खुले और उपयुक्त स्थान पर बनाई जाती तो अधिक सुविधाजनक होती।पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रमोद मोदी ने आरोप लगाया कि भाजपा बोर्ड ने पालिका क्षेत्र की कीमती जमीनें बेचकर पैसों का दुरुपयोग किया।जबकि यह धन आम आदमी की छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए था। नेताओं ने यह भी कहा कि अब रबर स्टाम्प चेयरपर्सन को दोष देकर जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता, क्योंकि असली फैसले कहीं और से लिए गए। कपासन की जनता इस विफल और भ्रष्ट बोर्ड को आने वाले समय में करारा जवाब देगी।नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने जनता की मांग पर कपासन के लिए ऐतिहासिक विकास कार्य स्वीकृत किए थे, जिनमे 6 करोड़ की सड़कें,4 करोड़ का महात्मा गांधी विद्यालय,4 करोड़ का कपासन पुलिस थाना,4 करोड़ का कन्या महाविद्यालय,उप जिला चिकित्सालय,अपर जिला एवं सत्र न्यायालय एडीजे कोर्ट ये सभी परियोजनाएँ राजस्थान की गहलोत सरकार द्वारा अपने कोष से स्वीकृत की गईं, जबकि वर्तमान भाजपा बोर्ड केवल नगर की जमीनें बेचकर वाहवाही लूटने में व्यस्त रहा।बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष रहीं कन्या देवी सोनी ने कहा कि बोर्ड बैठकों में जनहित के कई प्रस्ताव उठाए गए, परंतु उन्हें लागू नहीं किया गया।विपक्ष द्वारा बार बार सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सड़क मरम्मत और जल निकासी सुधार के लिए लिखित मांगें रखी गईं, लेकिन प्रशासन ने इन्हें प्राथमिकता नहीं दी।कई महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय बिना पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा और पारदर्शिता के लिए गए।जमीनों की नीलामी से पहले आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से उचित राय मशविरा नहीं किया गया।जिससे नगर के हित प्रभावित हुए।जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय बोर्ड का अधिकतर ध्यान भव्य निर्माणों और प्रचार प्रसार पर केंद्रित रहा।
नगर कांग्रेस कमेटी कपासन की जनता को विश्वास दिलाती है कि वह इस विफल और जनविरोधी शासन का कड़ा विरोध करेगी और आने वाले समय में पारदर्शी, जवाबदेह, जनकल्याणकारी और वास्तविक विकास की राजनीति स्थापित करेगी।