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सीधा सवाल। कपासन। मातृभाषा के बिना न आनन्द मिलता है, न विस्तार होता हैं। और न ही हमारी योग्यताएँ प्रफुल्लित होती हैं।ऐसे विचार रवीन्द्रनाथ टैगोर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 के उपलक्ष में मनाए जा रहे मातृभाषा पखवाडा में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा की महता विषय पर परिसंवाद के बीच वक्ता एवं मुख्य अतिथि राजस्थान के शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास क्षेत्र सह संयोजक नितिन कुमार जैन ने कहे। नितिन कुमार जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चे अपने भावों को मातृभाषा में व्यक्त करने में सुख का अनुभव करते हैं।अध्यापक यदि मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाता है तो बच्चे में सीखने की प्रेरणा और आत्मविश्वास पैदा होता है। मातृभाषा में रचा भावात्मक साहित्य प्रेम, करूणा, त्याग, सहानुभूति, परोपकार जैसे भावों का पोषण करता है। भारत को पुनः विश्वगुरू बनाने में एक शिक्षक की महती भूमिका होगी व नैतिकता व चरित्र निर्माण के द्वारा पुनः भारत को गौरव दिला सकता है। जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्व से प्रेम करो और इस स्व की भावना को अपनाते हुए भारत की संस्कृति को अंगीकार करो। इस हेतु उन्होंने कहा कि जैसे भारत को अंग्रेजी में इंडिया लिखते हैं लेकिन नई संकल्पना के आधार पर अब अंग्रेजी में भी भारत ही लिखेंगे। इस संकल्पना का महाविद्यालय प्रबंध निदेशक डॉ. वसीम खान ने स्वागत करते हुए संस्था द्वारा त्वरित गति से प्रस्ताव लेकर निर्णय लिया कि अब दीक्षा क्रियेशन्स सोसायटी द्वारा संचालित सभी महाविद्यालयों में भी आंग्ल भाषा में इंडिया के स्थान पर भारत ही लिखा जाएगा।मातृ भाषा परिसंवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय प्रबंध निदेशक डॉ. वसीम खान ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मनिर्भर व विकसित भारत तभी बन सकता है जब भारत का हर युवा भारतीय परंपराओं को आत्मसात करे। विदेशी का भाव छोडकर नैतिकता की कसौटी पर खरा उतरकर देशहित में कार्य करे तो भारत पुनः सोने की चिडिया बन सकता है। डॉ. खान ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा की महता पर बोलते हुए कहा कि पांचवी से आठवी तक मातृभाषा में शिक्षण से विद्यार्थियों का मानसिक एवं भावात्मक विकास संभव होगा। लेकिन उच्च शिक्षा में समेस्टर प्रणाली लागू कर विद्यार्थियों पर बढा आर्थिक बोझ एक चिन्ता का विषय है। इस प्रणाली ने उच्च शिक्षा में सर्वांगीण विकास को अवरूद्ध किया है।परिसंवाद संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसिंह चुण्डावत ने बताया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपासन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा की महता विषय पर एक दिवसीय परिसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परिसंवाद का शुभारम्भ मां शारदे के दीप प्रज्ज्वलन व वन्दे मातरम गान से हुआ। तत्पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार एवं अकादमिक निदेशक शिव नारायण शर्मा ने सभी का स्वागत किया। अतिथियों का परिचय हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसिंह चुण्डावत ने प्रस्तुत किया। सभी का आभार महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. एस. एन. ए. जाफरी ने प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका जैन ने किया। परिसंवाद में लगभग 190 विद्यार्थी एवं विद्वानजनों ने शिरकत की।