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पुलिस का भी सामने आया दोहरा रवैया
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़।
जिले के गंगरार में संचालित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बिना मान्यता के बीएससी नर्सिंग के पाठ्यक्रम में प्रवेश देने के मामले को लेकर चल रहे 27 दिन के विरोध के बाद डिग्री मांगने वाले छात्रों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि छात्रों ने पेट्रोल डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया और राज्य कार्य में बाधा उत्पन्न की इसलिए कार्रवाई की गई है। लेकिन इन सब के बीच जो तथ्य निकल कर सामने आए हैं उनसे पुलिस पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह से संदेह के घेरे में आ गई है। फिलहाल डिग्री मांगने के लिए आंदोलन करने वाले 17 कश्मीरी छात्रों को जेल जाने का इनाम मिला है। वही इस पूरे मामले में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस पूरी गड़बड़ी को प्रश्रय देती प्रतीत हो रही है। अब एनएसयूआई ने इस पूरे मामले में धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
27 दिन से चल रहा था प्रदर्शन, न्याय नहीं मिलने पर आक्रोशित हुए छात्र
भारतीय सेना की सद्भावना योजना के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले कश्मीरी छात्र छात्राओ सहित कुल 40 से अधिक विद्यार्थियों की डिग्री को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन सरकार पर आरोप लगाकर पल्ला झाड़ रहा है। वहीं विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल को जयपुर जाने पर जानकारी मिलेगी मेवाड़ यूनिवर्सिटी की मान्यता संबंधी कोई पत्रावली लंबित नहीं है। ऐसे में लगातार 27 दिन से चल रहा आंदोलन सोमवार को उग्र हो गया और मानसिक अवसाद में चल रहे छात्रों ने आत्मदाह का प्रयास किया जिन्हें पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। और 17 कश्मीरी विद्यार्थियों को न्यायिक अभिरक्षा भी भेज दिया गया है। ऐसे में डिग्री लेने के लिए आए छात्र अब जेल की हवा खा रहे हैं।
खाकी की खुद्दारी पर भी उठ रहे सवाल!
इस पूरे मामले में जहां छात्रों को न्याय नहीं मिल पा रहा है वहीं अब पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। थाना अधिकारी श्यामलाल ने बताया कि यूनिवर्सिटी सुचारू होने की जानकारी पर पुलिस वहां पहुंची थी इस मामले में कोई लिखित रिपोर्ट नहीं मिली थी। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भगवत सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था के लिए यहां पहुंचे तो छात्र आत्मदाह करने लगे जिन पर प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं कि रविवार को गंगरार थाना इलाके के जीवाराम जी का खेड़ा एमडी बनाने की फैक्ट्री पर कार्रवाई करने के बाद अतिक्रमण तोड़ने के लिए पहुंची पुलिस के सामने खुद पर पेट्रोल डाला और जमकर विरोध किया लेकिन उसके बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई करने के बजाय बैरंग लौट गई। वही डिग्री की मांग करने वाले छात्रों पर राज्य कार्य में बाधा जैसे प्रकरण दर्ज कर उन्हें जेल पहुंचा दिया गया। इससे खाकी की खुद्दारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। और ऐसा प्रतीत हो रहा है की यूनिवर्सिटी प्रबंधन के दबाव में पुलिस कार्य कर रही है। इसी के साथ छात्रों द्वारा दर्ज करवाई गई रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं करना पुलिस की कार्य प्रणाली को संदिग्ध बना रहा है।
छात्राओं ने लगाये अभद्रता के आरोप, नहीं हो रही कोई कार्रवाई
मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में पंजीकृत आंदोलन से जुड़ी छात्राओं ने केमरे पर बताया कि उनके आंदोलन को दबाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आंदोलन के दौरान उन्हें तरह-तरह से परेशान किया गया सतपाल सिंह नाम के व्यक्ति ने उनके बुर्के खींचे उनके साथ धक्का मुक्की की जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस और प्रशासन को की लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है उल्टे जो छात्र डिग्री मांग रहे हैं और उसके लिए आंदोलन कर रहे हैं उनके आंदोलन को दबाने के लिए छात्रों को पकड़ा जा रहा है। मंगलवार सुबह 6:00 तक उन्हें हॉस्टल खाली कर बाहर निकलने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। इससे लगने लगा है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के संचालन से जुड़ी मेवार एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अशोक गदिया के आगे प्रशासन नतमस्तक है। एक और जहां अपराधियों के अतिक्रमण को तोड़ने गई पुलिस को अपमानित होना पड़ा वहीं छात्राओं के इतने गंभीर आरोपों पर कार्रवाई नहीं होना पुलिस के उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। वही इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी में पूरे मामले को गंभीर बना रही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ जिले में अधिकांश निर्वाचित जनप्रतिनिधि खुद के छात्र राजनीति के और छात्र संघर्ष के मुद्दों को उठाकर राजनीति में आगे बढ़ने का दावा करते रहे हैं। ऐसे में छात्र हितों पर हो रहे कुठाराघात को लेकर आखिर छात्र नेता से जनप्रतिनिधि बने जिम्मेदार चुप क्यों है यह भी समझ से परे है।
एनएसयूआई ने दिया छात्रों का साथ
इस पूरे मामले में एनएसयूआई ने इस छात्र आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय राव ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी पहुंचकर छात्रों को साहस दिया। वहीं उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्र हित के इस मामले में हम छात्रों के साथ खड़े हैं इसे लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन दिया जाएगा छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।