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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। काला सोना कहे जाने वाली अफीम का तौल प्रारंभ होने के साथ ही नारकोटिक्स कार्यालय चित्तौड़गढ़ में किसानों की आवाजाही बढ़ गई है। दूसरे दिन सोमवार को अल सुबह 4 बजे से अफीम तौल की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। किसान रात से ही अपनी बारी के इंतजार में नारकोटिक्स विभाग में डेरा डाले हुए है, जिससे सुबह अफीम का तौल किया जा सके।प्रथम खंड के पहले दिन रविवार को 18 गांवों के 303 किसानों की अफीम का तौल किया गया। इसके बदले किसानों को 45 लाख रुपए का भुगतान बैंक खातों में किया गया।
जिला अफीम अधिकारी बीएन मीणा ने बताया कि सोमवार को सुबह 4 बजे से कंटेनर आवंटित होने के साथ ही तौल की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। अफीम तौल की शुरुवात रविवार को की गई थी। पहले दिन प्रथम खंड में 18 गांवों के 303 किसानों की 2497.890 किलो अफीम का तौल किया गया। इसके बदले में किसानों को 45 लाख रुपए का भुगतान किया गया। किसानों के लिए मुख्यालय के निर्देश पर आवश्यक व्यवस्थाएं की है। यहां सुरक्षा को लेकर सीसी टीवी कैमरे भी लगाएं हैं।
डेढ़ करोड़ खाते में, इसलिए हाथों हाथ भुगतान
प्रथम खंड के नारकोटिक्स अधिकारी बीएल मीणा ने बताया कि विभाग के खाते में करीब डेढ़ करोड़ रुपए हैं। वित्तीय वर्ष के समाप्त होने पर बजट लेप्स हो सकता है। ऐसे में विभाग किसानों को अफीम तौल होते ही 90 प्रतिशत भुगतान हाथों-हाथ दिया जा रहा है। वहीं शेष 10 प्रतिशत भुगतान अफीम फैक्ट्री से जांच रिपोर्ट आने पर किया जाएगा। वहीं एक अप्रैल से भुगतान में बदलाव होगा। अफीम तौल के तीसरे दिन जांच रिपोर्ट आएगी और किसान को पांचवें दिन शत प्रतिशत भुगतान कर दिया जाएगा।
केन में नीमच भेजी जा रही अफीम
पिछले वर्षों में चित्तौड़गढ़ क्षेत्र की अफीम विशेष रेल के माध्यम से झारखंड के गाजीपुर स्थित अफीम फैक्ट्री में भेजी जाती रही है। लेकिन दो-तीन वर्षों से अफीम तौल के बाद हाथों-हाथ कंटेनर लोड कर अफीम नीमच भेजी जा रही है। जानकारी के अनुसार अब तक 2 चालान अर्थात 200 केन अफीम नीमच भेजी गई है। कंटेनर के माध्यम से भेजी जाने वाली इस प्रक्रिया में 100 केन का एक चालान माना जाता है।
दूसरे खंड में भी तौल होगा शुरू
चित्तौड़गढ़ जिले में अफीम की खेती के बंदोबस्त को तीन खंड में बांटा गया है। खंड प्रथम में अफीम का तौल शुरू हो गया है। वहीं खंड द्वितीय एवं तृतीय में आने वाले किसानों की का तौल दो अप्रैल से होगा। खंड तृतीय में जिले की निंबाहेड़ा एवं बड़ीसादड़ी तहसील के किसानों के अफीम तौल की व्यवस्था निंबाहेड़ा में होगी।
किसान बोले, 20 साल से भाव बढ़ने का इंतजार
इस संबंध में अफीम तौलने आए किसानों से भी बात की है। चित्तौड़गढ़ तहसील के रोजडा गांव निवासी शंकरलाल ने बताया कि करीब 20 साल से अफीम के भाव नहीं बताए गए हैं। देश के प्रधानंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय अफीम खरीद के भाव बढ़ाए गए थे। इन 20 सालों में खेती महंगी हो गई है। अफीम की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसान ने बताया कि नारकोटिक्स विभाग को नीति में कुछ अहम परिवर्तन करने चाहिए। उनके अनुसार मॉर्फिन और औसत अधिक देने वाले किसान का अफीम बुवाई का रकबा बढ़ना चाहिए। इससे किसानों में प्रतिस्पर्द्धा की भावना पैदा हो और अफीम की ज्यादा उपज मिल सके। वहीं उन्होंने बताया कि औसतन किसान को 2000 से 2200 रुपए प्रति किलो सरकार से भुगतान मिलता है, जो अफीम की खेती के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।