चित्तौड़गढ़ - सफेदकोटधारी सरगना या फिर शिकार !
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चित्तौड़गढ़ - लोहे के पिंजरे में मिल गाय का शव, मंडफिया थाना इलाके की घटना

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कैंसर की काली कमाई खेल में रोज खुल रहे नए राज,एक कंपनी की शिकायत पर चल रही जांच

सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। जानलेवा बीमारी कैंसर को लेकर चल रहे काली कमाई के खेल में धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों की भूमिका को लेकर सवाल खड़ा हो गया है,कि इस काली कमाई के खेल में सफेद कोट पहने धरती के भगवान इस गिरोह के सरगना है, या फिर खुद शिकार हुए हैं। लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। जिनमे पहले से बीमार और अधिकांश कैंसर के रोगियों को बीमारी छुपा कर उनका जीवन बीमा ,स्वास्थ्य बीमा और वाहन फाइनेंस करवा कर मोटी कमाई की जा रही है। सारा खेल पुलिस रिपोर्ट और चिकित्सकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर चल रहा है। जिनमे बीमा क्लेम के लिए करंट से मौत या फिर दुर्घटना में मौत बता कर क्लेम उठाए जा रहे हैं। पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि कारण से हुई मौत को लेकर राज्य सरकार या विद्युत विभाग के पास ना तो कोई शिकायत की गई है और ना ही कोई क्लेम अथवा दावा किया गया है जिसमें कृषि कार्य करने के दौरान मौत होने की बात कही गई है। ऐसे में दक्षिण भारत की एक कंपनी की ओर से दर्ज करवाया गया परिवाद इस बात की पुष्टि करता है कि जिले के राशमी कपासन और भदेसर क्षेत्र में फर्जी इंश्योरेंस करवाने वाला गिरोह सक्रिय है जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस कारनामें को अंजाम दे रहा है। अब राशमी क्षेत्र से एक साथ 5 इंश्योरेंस क्लेम को लेकर कंपनी की शिकायत के बाद स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में और भी कई मामले सामने आ सकते हैं।


करंट से हो रही मौते, विद्युत विभाग के रिकॉर्ड में नहीं !

बीमार लोगों का मोटा बीमा कराकर काली कमाई करने वाले इस गिरोह के शिकार लोग अशिक्षित अथवा ग्रामीण तबके के हैं। क्लेम लेने के अधिकांश मामले खेत पर काम करने के दौरान ट्यूबवेल चालू करने अथवा करंट लगने से मौत होने के कारण बताए जा रहे हैं। जबकि जब जब भी इस प्रकार के मामले पुलिस रिकॉर्ड में अथवा पोस्टमार्टम में सामने आए हैं उसे समय में विद्युत विभाग के पास करंट से मौत का कोई मामला ही सामने नहीं आया है। सूत्रों की माने तो जिले भर के केवल कपासन, राशमी और भदेसर क्षेत्र में ही ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें मौत करंट लगने से हुई है लेकिन विद्युत विभाग की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में यदि चिकित्सा और पुलिस विभाग की रिपोर्ट को सही माने तो विद्युत वितरण निगम की लापरवाही के चलते लाखों रुपए के क्लेम इन लोगों तक नहीं पहुंचे हैं जो कि नियमानुसार इन्हें दिए जाने चाहिए। क्योंकि कृषि कार्य करने के दौरान करंट लगने से होने वाली मौत के मामले में सरकार भी मुआवजा राशि देती है और विद्युत विभाग भी रिपोर्ट करता है तो ऐसे में अगर इतने मामले करंट लगने के हैं तो इन्हें सरकारी मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।

चिकित्सकों की भूमिका पर सवाल बोर्ड का गठन

चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी इलाके के मुरोली, देवीपुरा-रेवाडा, जालमपुरा और गुरजनिया क्षेत्र के पांच इंश्योरेंस क्लेम के मामले में गिरोह के सक्रिय होने की आशंका को लेकर फर्जीवाड़े की शिकायत यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से भिजवाई गई है। जिसमें पांच लोगों की करंट से मौत होने के मामले की फर्जी होने की शिकायतकर इंश्योरेंस का क्लेम उठाने की जानकारी सामने आई है। लगातार दूसरी बार शिकायत करने के बाद इस मामले में जांच शुरू की गई है। इसमें चिकित्सकों की रिपोर्ट पर जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

करंट से मौत के मामले में कपासन आगे मुआवजे में पीछे

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करंट से होने वाली मौत के मामले में कपासन क्षेत्र भी पीछे नहीं है यहां भी करंट से लगातार मौते हो रही है चिकित्सा विभाग के मेडिकल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस विभाग के मामले में इस बात की पुष्टि होती है लेकिन ऐसे लोग जिनकी करंट से खेत पर काम करने दौरान मौत हुई है उनको मुआवजा देने के मामले में उपखंड प्रशासन पीछे है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि यहां भी करंट से मौत के मामले में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। और यदि ऐसा नहीं है तो यहां के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं क्योंकि लगातार करंट से होने वाली मौत के मामले में सरकार से मुआवजा दिलाने में जनप्रतिनिधि कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।

चिकित्सक मजबूर या लाभार्थी!

इस पूरे मामले में फिलहाल चिकित्सकों की भूमिका जहां इंश्योरेंस क्लेम दिलवाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है वहीं दूसरी ओर अंदरखाने यह चर्चा भी जोरों पर है कि राजनीतिक दबाव में चिकित्सकों को ऐसी रिपोर्ट बनानी पड़ती है जिसमें करंट से मौत होना दर्शाया गया हो। लेकिन बिना किसी आर्थिक लाभ के इतनी बड़ी तादाद में इस तरह की रिपोर्ट चिकित्सकों द्वारा बनाना केवल राजनीतिक दबाव में गले नहीं उतर रहा है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि सफेद कोट पहने धरती के यह भगवान इस गिरोह के सदस्य है या फिर इस फर्जीवाड़े के खुद भी दबाव में शिकार बने है।

जिला मुख्यालय पर भी चल रहा है गिरोह !

चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर भी फर्जी इंश्योरेंस करवाने वाला गिरोह सक्रिय है जो ऑनलाइन अथवा एजेंट के नाम से इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद कर मौत से मिलने वाली कमाई का मोटा हिस्सा खुद डकार कर छोटी मोटी राशि मृतक के परिजनों को देकर इस खेल का संचालन कर रहा है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि भरतपुर क्षेत्र के निवासी एक युवक द्वारा लंबे समय से यहां इस खेल को चलाया जा रहा है।



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