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आरती व भण्डारे के साथ कथा की पूर्णाहुति
सीधा सवाल। कनेरा। उपतहसील कनेरा के समीप हनुमंतिया ग्राम में आज कथा का समापन दिवस रहा, वहीं अंचल में कड़कड़ाती ठिठुरन भरी ठंड शीतलहर की परवाह किए बगैर.. हनुमंतिया की पावन नगरी में गौ भक्त कथा मर्मज्ञ महाराज श्री के मुखारविंद से झरता अमृत. उस पर हजारों भक्तों का श्रीमद्भागवत में अभिभूत होकर पूरे मनोभाव के साथ कथा का श्रवण करना सब कुछ अद्भुत था। चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतिम दिन बुधवार 14 जनवरी मकर संक्रांति को पूर्णाहुति विश्राम हुई।
कथा स्थल ही नहीं हनुमंतिया की सभी गली मार्ग जनसमूह से सरोबोर हो गया। कथा के भवसागर में हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकियां लगाई। व्यास पीठ पर विराजित गौ भक्त कथा मर्मज्ञ सत्यानंद महाराज के स्वर , कभी द्वारकाधीश की जय जय कार गूंजा ।कथा आयोजक समिति की ओर से गौ भक्त कथा मर्मज्ञ महाराज ,मूल पाठ रंगलाल नागदा मिठूलाल नागदा मंत्र जाप महेश नागदा हरिदास जी महाराज मंच पर विराजित रहे। संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण में अत्याधुनिक वाद्य यंत्र के कलाकारों को शाल श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया।
विगत 7 दिनोंसे अमृत ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही थी तो श्री कृष्ण लीला की खुशी का रंग और बंट रहा था तो स्वामी सत्यानंद सरस्वती पीएचडी दर्शन शास्त्र महाराज का अमृत ज्ञान प्रसाद,जिसे पाकर विशाल जनसमूह धन्य हो गया। कथा के अंतिम दिन श्रीमद् भागवत कुंभ में सुदुर ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का पुरा जन समुह का अमृत स्नान पूरा हुआ।
कथा मर्मज्ञ सत्यानंद सरस्वती महाराज ने भक्ति रस का प्रवाह करते हुए कहा कि तुम यह कह रहा हूं श्रीमद् भागवत महापुराण मनोरंजन का साधन नहीं है यह शास्त्र का अपमान है श्रीमद् भागवत महापुराण को सुनाना चाहिए श्रवण करने से सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करता है आत्म ज्ञान प्राप्त होता। ओर अज्ञान नष्ट होता है श्री कृष्ण का श्राप सुदामा ने दरिद्रता का कष्ट अपने ऊपर ले लिया था और अपने मित्र के रक्षा की। मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी होनी चाहिए जो जीवन में एक दूसरे के दुखों में काम आ सके।जीवन जो व्यक्ति अपने जीवन को ईमानदारी से जीता है उसे मृत्यु से कोई भय नहीं लगता है यही जीवन का सत्य है। सुदामा ब्रह्मज्ञानी थे, सुदामा जानते थे कि गुरु माता द्वारा दिए गए चने श्रापित हैं फिर भी उन्होंने अपने मित्र श्री कृष्ण के ऊपर दरिद्रता ना आए स्वयं ने श्रापित चने खा लिए और स्वयं ने दरिद्रता अपने ऊपर लेली। सुपात्र व्यक्ति को दान प्रदान किया जाता है तभी उसका पुण्य फल दायी होता है। सुशिला द्वारा प्रेषित दो मुट्ठी चावल तो श्री कृष्ण ने खा लिए थे। तीसरी मुट्ठी खाने लगे तब रुक्मणी ने हाथ पकड़ लिया और रोक दिया और कहा कि दो लोक तो सुदामा को दे चुके हो अब एक लोक तो अपने लिए रख लो, सुदामा की टूटी-फूटी झोपड़ी के स्थान पर महल बना दिया था। धर्म क्षेत्र में पुण्य कर्म करने वाले को अहंकार कभी नहीं होता है।हनुमंतिया में प्रतिदिन संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ 7 जनवरी से 14 जनवरी तक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ विश्राम के दौरान स्वामी सत्यानंद सरस्वती पीएचडी दर्शनशास्र द्वारा आयोजक धाकड़ औरा परिवार के सदस्यो जगदीश चन्द्र रामेश्वर प्रहलाद सरपंच सत्यनारायण धाकड़ औरा रामचंद्र जी हरिराम जी द्वारा अपने स्वर्गीय परिजनों स्व रतनलाल जी नंदलाल जी की स्मृति में परिजनों द्वारा में सफल धार्मिक आयोजन किया गया। ।
इस अवसर पर गोपाल चंद्रवंशी, हलवाई हरगोविंद ,दिवान सुनील मंगवानी, गूडडा हलवाई, गोतम ग्वाला, केसरी मल जैन ,धर्मेश दूबे ,उदयलाल मेनारिया, मगनलाल राठौर ,बंशीलाल नागदा ,पुष्कर नागदा सहित आस-पास के गांवों के कई गणमान्य श्रद्धालु भक्त मौजूद थे । जिन्होंने कथा में सहभागी बन कर कथा को आत्मसात किया और कथा मर्मज्ञ स्वामी सत्यानंद सरस्वती महाराज पीएचडी दर्शन शास्त्र श्री का आर्शीवाद लिया। कथा प्रवचन के अंतिम दिन हवन पूजन एवं महाआरती के साथ प्रसाद के रूप में (भंण्डारा) किया गया । इसी के साथ साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन की पूर्णाहुति के साथ कथा का विश्राम हुआ।