चित्तौड़गढ़ - हजारों की सरकारी तनख्वाह फिर भी पेंशन की भूख, ऑनलाइन चूक का फायदा उठा सरकार के साथ की धोखाधड़ी
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राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों से जुड़ा मामला

सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। एक और जहां सरकार यूनिक आईडी के माध्यम से वास्तविक दिव्यांगों तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचने का काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं, जो सरकार की मंशा को पलीता लगाने के लिए फर्जीवाड़ा करने से भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला चित्तौड़गढ़ में सामने आया है, जहां दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए पहले तो पेंशन शुरू करवाई गयी। उसके बाद इसका फायदा लेकर राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी में नौकरी प्राप्त की गई अब नौकरी का मानदेय और सरकार की पेंशन दोनों का एक साथ लाभ उठाया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि यह प्रमाण पत्र जिसके जरिए यह सारा खेल खेला गया है वह भी नियमों के अनुरूप संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार से सालों से पेंशन का लाभ और उसके बाद दिव्यांग होने का लाभ उठाते हुए नौकरी लेने के दोहरे लाभ का यह मामला सामने आया है। अब देखने वाली बात होगी कि एक और जहां खाद्य सुरक्षा के मामले में सरकार गंभीरता पूर्ण तरीके से काम करते हुए वसूली की जा रही है वहीं इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

यह है मामला


श्री सांवलिया जी राजकीय चिकित्सालय में संचालित एआरटी केंद्र पर कार्यरत एक महिला कार्मिक मंजू राव से यह पूरा मामला जुड़ा हुआ है। साल 2017 में निंबाहेड़ा चिकित्सालय से इसे स्थाई दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसी के आधार पर इसकी पेंशन शुरू हो गई साल 2020 में राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत डाटा एंट्री ऑपरेटर पद पर इस प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए 19000 से अधिक के मानदेय नौकरी प्राप्त कर ली लेकिन अपनी पेंशन फिर भी नहीं छोड़ी। उसके पश्चात साल 2024 में जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ तो 2017 में बने हुए 2022 के ऑनलाइन प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए दोबारा इसका फायदा उठाया। पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि वर्तमान में इस कार्मिक को राजस्थान स्टेट इट्स कंट्रोल सोसाइटी के जरिए 24300 रुपए वेतन के रूप में प्राप्त हो रहे हैं। वही मार्च 2026 तक दिव्यांग पेंशन की राशि भी इस कार्मिक द्वारा उठाई गई है। ऐसे में मेडिकल विभाग में होने का फायदा उठाते हुए एक प्रमाण पत्र के आधार पर दो जगह से लाभ उठाया जा रहा है। और एक योग्य लाभार्थी के अधिकार का हनन हो रहा है। वहीं महिला द्वारा इस प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए दिव्यांगों को दी जाने वाली स्कूटी का लाभ भी ले लिया और मजेदार बात यह है कि इसे सामान्य स्कूटी में परिवर्तित भी करवा लिया। ऐसी स्थिति में सरकार के सभी लाभ लेने के बावजूद खुद को लाभार्थी बताने से भी परहेज किया जाना समझ से परे है। यहां यह भी बता दे की ₹60000 की वार्षिक आय वाले को दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ नहीं दिया जाता है।

सिस्टम की चूक का उठाया फायदा


दरअसल इस पूरे मामले में सरकार के सिस्टम में हुई भूल का जमकर आर्थिक फायदा उठाते हुए फर्जीवाड़ा किया गया। सरकार द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया साल 2022 में शुरू की गई। साल 2017 में स्थाई दिव्यांग का प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाली मंजू राव का प्रमाण पत्र भी स्थाई होने के चलते ऑनलाइन हो गया। परंतु इसके बाद भी सरकार ने ऐसे प्रमाण पत्रों का दोबारा सत्यापन करवाने की प्रक्रिया शुरू करवाई जिसमें प्रमाण पत्र धारी को दोबारा सत्यापन करवाना था। परंतु वर्तमान तक स्थाई प्रमाण पत्र होने के चलते इसका दोबारा भौतिक सत्यापन नहीं करवाया गया और इसके जरिए नौकरी पेंशन स्कूटी जैसी योजनाओं का लाभ ले लिया गया। जानकारों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की मेडिकल बोर्ड से जांच करवाई जाए तो यह दिव्यांग प्रमाण पत्र भी फर्जी साबित होगा। क्योंकि स्कूटी प्राप्त करने के बाद दिव्यांगों को दी जाने वाली विशेष स्कूटी का भी इस कार्मिक द्वारा अपने स्तर पर सामान्य स्कूटी में परिवर्तन करवा लिया गया। इससे प्रतीत होता है कि इस महिला द्वारा पूर्व में जारी किए गए प्रमाण पत्र को माइग्रेंट आधार पर ऑनलाइन होने का फायदा उठाते हुए सरकार की आंखों में धूल जॉब कर अपने फायदे के लिए उपयोग किया जा रहा है।

वसूली और आपराधिक प्रकरण तक के हैं प्रावधान


उल्लेखनीय है कि नियमों के विपरीत लाभ प्राप्त करने को लेकर सरकार पूरी तरह से सख्त है। पूर्व में ऐसे कहीं मामले सामने आए हैं जहां खाद्य सुरक्षा में नियम विपरीत लाभ लेने वालों से वसूली की गई है और इससे खाद्य सुरक्षा के कई लाभार्थियों के नाम सूची से लोगों ने स्वेच्छा से भी कटवा लिए। परंतु इस महिला द्वारा साल 2020 में नौकरी लगने के बावजूद साल 2026 तक लगातार पेंशन उठाया जाना और राज्य सरकार के निर्देश होने के बावजूद प्रमाण पत्र का भौतिक सत्यापन दोबारा नहीं करवाना स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि जानबूझकर केवल आर्थिक फायदा और योग्य अभ्यर्थी का अधिकार हनन करने के लिए तथ्य छुपाए गए। और चुकी प्रमाण पत्र के ऑनलाइन दिखाई देने से जिम्मेदार भी इस महिला की पूरी धोखाधड़ी को पकड़ नहीं पाए। नतीजा यह हुआ कि पहले पेंशन फिर नौकरी फिर नौकरी के साथ लगातार पेंशन और बाद में स्कूटी प्राप्त कर लेने जैसे धोखाधड़ी के कृत्य लगातार किए गए। महिला द्वारा अपने अधिकारीयो को गुमराह करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी गई इससे साफ होता है, कि जानबूझकर इस पूरे मामले में तथ्य छुपाए गए जिससे कि फायदा उठाया जा सके। यह अपने आप में सरकार के साथ धोखाधड़ी करने जैसा गंभीर श्रेणी का अपराध है । अब देखने वाली बात होगी कि इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

बड़ा सवाल आखिर और ऐसे कितने....?


इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि सहानुभूति का उपयोग करते हुए इस महिला द्वारा किसी दिव्यांग योग्य अभ्यर्थी के अधिकार का हनन करने के सुनियोजित षड्यंत्र में इसके शरण दाता कौन-कौन है। साथ ही ऐसे और कितने मामले हैं जहां इस प्रकार के फर्जी प्रमाण पत्रों से या फर्जी तथ्यों के आधार पर सरकार की योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाया जा रहा है। सूत्रों से जानकारी में यह भी सामने आया है कि माइग्रेंट आधार पर ऑनलाइन हुए दिव्यांग प्रमाण पत्र में औपचारिकताएं भी पूरी नहीं की गई है। लेकिन प्रमाण पत्र के ऑनलाइन हो जाने से योजनाओं का लाभ देने के लिए केवल प्रमाण पत्र की ऑनलाइन होने की औपचारिकता अनिवार्य होने का फायदा उठाते हुए इसे जारी करवाने के पीछे हुई ऑनलाइन चुक का जानबूझकर फायदा उठाया गया। सीधा सवाल की पड़ताल में सामने आया है कि इस महिला कार्मिक द्वारा योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय स्तर पर सिफारिश और यहां तक की जनप्रतिनिधियों द्वारा लिखित रूप से अनुशंसा की गई है, इसके दस्तावेज भी सीधा सवाल के पास मौजूद है। इससे साफ होता है कि एक योग्य अभ्यर्थी का अधिकार हनन करने के लिए जमकर जालसाझी की गई। इसके लिए तकनीकी चूक का फायदा उठाते हुए राजनीतिक रसूख का भी जमकर उपयोग किया गया। अब मामला सामने आने के बाद यह भी जांच का विषय है कि इस मामले को आधार बनाते हुए और कितने मामलों में योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन करने वाले ऐसे लोगों तक प्रशासन पहुंच पाता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि फर्जी दस्तावेजों या तथ्य छुपा कर नौकरी प्राप्त करने वालों के विरुद्ध सरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए इस मामले में पहले से ही जांच में जुटी हुई है।


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