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सीधा सवाल। चिकारड़ा। जैन समाज के चातुर्मास के अंतर्गत पर्यूषण पर्व को लेकर पिछले आठ दिनों से जप तप त्याग बेला तेला अठाइ आदि उपवास करते हुए मन काया वचन को शुद्ध करने का प्रयास किया। वर्ष भर में यह आठ दिन ही ऐसे होते हैं जिसमें समाज के प्राणी मात्र अपनी काया को सुधारते हुए सनातन धर्म के संत पथ पर चलने का मार्ग खोजता है। चिकारड़ा में चातुर्मास के दौरान बिराजित मासा (साध्वियों) के माध्यम से ग्रामीणों ने धर्म ध्यान का लाभ लिया । वही प्रतिदिन व्याख्यानों के माध्यम से अपने मन को वश में करने का तथा विभिन्न मार्गो से गुजरते हुए मन को एकाग्र करना ही पर्यूषण पर्व सार्थक है। पर्यूषण पर्व के समाप्ति पर सभी समाज जनों ने एक दूसरे को खमत खामना (मिच्छामी दुक्कडम) कर इस प्रथा को आगे की ओर बढ़ाया है। सनातन काल में घर-घर जाकर एक दूसरे को खमत खामना कहकर भूल सुधार के साथ रिश्ते कायम करने की प्रथम रही है। कलयुग के चलते यह प्रथा धीरे-धीरे प्राय लुप्त सी होती जा रही है और सोशल मीडिया ने इसका पूरा भार उठा लिया। सोशल मीडिया के माध्यम से सभी एक दूसरे को मिच्छामी दुक्कड़म का लोगो डालकर इति श्री कर रहे हैं। वैसे आज भी पुरानी पीढ़ी इस प्रथा को निभाने के लिए घर-घर पहुंच रही है। इधर जैन मंदिर में भी भगवती लाल छाजेड़ के साथ वीरानी परिवार द्वारा आठ ही दिन अलग अलग झांकिया बनाई गई जिसमें मूलनायक ऋषभ देव पश्चार्य नाथ महावीर स्वामी का विशेष श्रृंगार किया गया । अंतिम दिन विशेष भजन संध्या का आयोजन किया गया । इस मौके पर भगवतीलाल छाजेड़ परिवार के साथ राहुल वीरानी कन्हैयालाल वीरानी परिवार उपस्थित थे।