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सीधा सवाल। निंबाहेड़ा।
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पूर्व यूडीएच मंत्री एवं निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने अनुसूचित क्षेत्र (TSP) की द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 (लेवल-1) में चयनित 75 शिक्षकों का जिला आवंटन निरस्त किए जाने का मुद्दा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सदन में उठाया।
कृपलानी ने बताया कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2022 में अनुसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों का चयन कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 30 जून 2023 तथा 18 जून 2024 को जारी परिणाम के आधार पर किया गया था। चयनित अभ्यर्थियों ने विधिवत कार्यग्रहण भी कर लिया था, लेकिन 29 अगस्त 2025 को 75 शिक्षकों का जिला आवंटन निरस्त कर उन्हें सेवा से कार्यमुक्त कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि श्रेणी (वेकेंसी) के पदों में अंतर परिवर्तन का कारण बताते हुए यह कार्रवाई की गई, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का इसमें कोई दोष नहीं था। इस निर्णय से 75 परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया। प्रभावित अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय में याचिका (DB SAW 1863/2025) दायर की, जिस पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने टर्मिनेशन आदेश पर स्थगन (स्टे) देते हुए सेवा से नहीं हटाने के निर्देश दिए।
ध्यान आकर्षण प्रस्ताव पर मंत्री दिलावर ने दिया जवाब
सदन में जवाब देते हुए मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि TSP क्षेत्र में सामान्य क्षेत्र के अभ्यर्थियों का चयन कर दिया गया था, जबकि पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद ऐसा किया गया। उन्होंने कहा कि चयन बोर्ड द्वारा प्रक्रिया में त्रुटि हुई है और उसी के आधार पर जिला आवंटन निरस्त किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि चयन बोर्ड स्वतंत्र है और दिव्यांगों के स्थान पर अन्य भर्ती नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि न्यायालय के आदेशानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
विधायक कृपलानी ने रखा पक्ष
मंत्री के जवाब पर कृपलानी ने कहा कि यदि चयन बोर्ड से त्रुटि हुई है तो उसका दंड चयनित अभ्यर्थियों को क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन 75 शिक्षकों ने सेवा ग्रहण कर ली थी और 27 माह बाद में उनका चयन निरस्त कर दिया गया, जिससे उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कई अभ्यर्थियों के वैवाहिक संबंध तक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि 75 शिक्षकों ने राजस्थान उच्च न्यायालय में शरण ली, जिस पर न्यायालय ने चयन प्रक्रिया के निरस्तीकरण पर रोक लगाकर सेवा बहाल की। बावजूद इसके विभाग ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया।
कृपलानी ने सदन को बताया कि वर्तमान में 75 में से 42 अभ्यर्थी न्यायालय स्थगन के बाद नौकरी कर रहे हैं, शेष 29 अभ्यर्थी बर्खास्त होकर बाहर बैठें हैं तथा 4 अभ्यर्थियों ने नौकरी जॉइन नहीं की। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी 75 चयनित अभ्यर्थियों को पुनः बहाल किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें लेवल-2 में समायोजित किया जाए अथवा लेवल-1 के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
उन्होंने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा सदन को दी गई जानकारी कि 18 दिसंबर 2025 के बाद किसी भी अभ्यर्थी को नहीं हटाया गया है, तथ्यात्मक रूप से पूर्णतः गलत है, उन्होंने बताया कि 18 दिसंबर 2025 के बाद 5 अभ्यर्थियों को हटाया गया है, जिनकी जानकारी उनके पास उपलब्ध है। इस मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा के बाद शिक्षक भर्ती-2022 का मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।