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सीधा सवाल। निंबाहेड़ा।
पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने विधानसभा में संविदा पर कार्यरत नर्सिंग ट्यूटरों को नर्सिंग अधिकारी भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 एवं 2023 में बोनस अंक देकर नियुक्ति प्रदान करने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने माननीय अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पर्ची के माध्यम से इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति दी गई।
विधायक कृपलानी ने कहा कि नर्सिंग अधिकारी भर्ती प्रक्रिया 2018 एवं 2023 में संविदा पर कार्यरत नर्सिंग ट्यूटरों को पीएचएन के बराबर बोनस अंक का लाभ नहीं दिया गया, जिससे वे भर्ती प्रक्रिया से वंचित रह गए। इस अन्याय के विरुद्ध अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली, जहां एकल पीठ तथा डबल बेंच दोनों ने अभ्यर्थियों की मांग को उचित ठहराते हुए उनके पक्ष में निर्णय दिया।
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि संविदा पर कार्यरत नर्सिंग ट्यूटरों को भी पीएचएन के समान पात्र मानते हुए बोनस अंक प्रदान कर नर्सिंग अधिकारी भर्ती 2018 एवं 2023 में शामिल किया जाए तथा नियुक्ति दी जाए। इसके बावजूद अब तक अभ्यर्थियों को न्यायालय के आदेशों की पालना में नियुक्ति नहीं दी गई है, जिससे वे लंबे समय से भटकने को मजबूर हैं।
कृपलानी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया 2023 में पीएचएन को बोनस अंक का लाभ दिया गया, जबकि उनका मूल कार्य एएनएम विद्यार्थियों को पढ़ाना होता है। इसके विपरीत नर्सिंग ट्यूटर समान योग्यता रखते हुए एवं उच्च शैक्षणिक पाठ्यक्रम पढ़ाने के बावजूद लाभ से वंचित रखे गए हैं, जो स्पष्ट रूप से असमानता दर्शाता है।
उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि कई मामलों में विभागीय अधिकारियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों के आदेशों की पालना में कोताही बरती जाती है, जिससे सरकार को न्यायालय के समक्ष असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय में गंभीरता दिखाते हुए न्यायालय के आदेशों की समयबद्ध पालना सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे सरकार की मर्यादा और न्यायपालिका का सम्मान बना रहे।
अंत में विधायक कृपलानी ने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि संविदा पर कार्यरत नर्सिंग ट्यूटर अभ्यर्थियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में उन्हें नर्सिंग अधिकारी भर्ती 2018 एवं 2023 में बोनस अंक सहित शामिल कर शीघ्र नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि लंबे समय से वंचित अभ्यर्थियों को राहत मिल सके।