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सुमेरपुर में विद्युत व्यवस्था पर बड़ा सवाल: आखिर जनता विभाग का काम कब तक करती रहेगी?
जला ट्रांसफार्मर हटाने तक नहीं पहुंचा बिजली विभाग, असाध्य बीमारी से जूझ रहे पत्रकार और ट्रैक्टर चालक ने उठाया 500 किलो से अधिक का बोझ
पुखराज कुमावत
सीधा सवाल।सुमेरपुर। श्रीराम गौशाला कोलीवाड़ा में बुधवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह ट्रांसफार्मर जलने के बाद गौशाला की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। भीषण गर्मी के बीच सैकड़ों गौवंश पानी के लिए तड़पते रहे, लेकिन आरोप है कि पूरे दिन विद्युत विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी समस्या के समाधान के लिए गंभीरता से आगे नहीं आया।
गौशाला व्यवस्थापक के अनुसार बिजली गुल होने से पानी की मोटरें बंद हो गईं और गौवंश के लिए पेयजल संकट खड़ा हो गया। गौशाला संचालकों ने तत्काल विद्युत विभाग से संपर्क किया, लेकिन मदद मिलने के बजाय उन्हें एक कर्मचारी से दूसरे कर्मचारी और एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास भेजा जाता रहा।
फोन पर जिम्मेदारी टालते रहे कर्मचारी, राहत के नाम पर मिला सिर्फ इंतजार
गौशाला प्रबंधन का आरोप है कि जब विभागीय कर्मचारियों से संपर्क किया गया तो किसी ने पदमाराम का नाम लिया, किसी ने मोहनलाल तो किसी ने पदमाराम
से बात करने को कहा। कई बार कार्यालय पहुंचने के बावजूद समाधान नहीं मिला। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने साफ शब्दों में यह तक कह दिया कि यह उनका काम नहीं है। दिनभर जिम्मेदारी का खेल चलता रहा, लेकिन मौके पर राहत पहुंचाने वाला कोई नहीं था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी किसान के खेत का ट्रांसफार्मर जलता है या किसी गौशाला की बिजली बंद होती है तो विभाग की सुस्ती तुरंत सामने आ जाती है। आम उपभोक्ता घंटों नहीं, बल्कि कई बार दिनों तक परेशान रहते हैं।
जब विभाग नहीं आया तो मैदान में उतरे पत्रकार और ट्रैक्टर चालक
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जले हुए ट्रांसफार्मर को हटाने की जरूरत पड़ी। गौशाला व्यवस्थापक का आरोप है कि विभाग की ओर से न तो कोई वाहन उपलब्ध कराया गया और न ही ट्रांसफार्मर को सुरक्षित हटाने के लिए कोई टीम भेजी गई।
आखिरकार एक असाध्य बीमारी से मौत की जंग ओर
संघर्ष कर रहे पत्रकार पुखराज कुमावत और ट्रैक्टर चालक चतराराम देवासी स्वयं आगे आए,और उन्होंने हिम्मत दिखाई
। दोनों ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 300 किलो से अधिक वजनी जले हुए ट्रांसफार्मर को ट्रॉली में चढ़ाया ताकि उसे बदलने की प्रक्रिया शुरू हो सके।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि ट्रांसफार्मर उठाते समय कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या विभाग ने किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की थी? क्या आम नागरिकों को विभाग का काम करने के लिए मजबूर होना चाहिए?
प्यास से बेहाल रहे गौवंश, गर्मी में बढ़ी परेशानी
भीषण गर्मी के बीच बिजली बंद रहने से पानी की आपूर्ति प्रभावित रही। गौशाला में मौजूद सैकड़ों गौवंशों के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया। गौसेवकों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ट्रांसफार्मर नहीं बदला जाता तो हालात और गंभीर हो सकते थे।
ग्रामीणों में आक्रोश, उठ रहे कई बड़े सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनता समय पर बिजली बिल जमा करती है तो संकट की घड़ी में विभाग अपनी जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट जाता है? आखिर ट्रांसफार्मर बदलना और उसे हटाना किसकी जिम्मेदारी है? यदि जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
जवाबदेही तय होगी या फिर दब जाएगा मामला?
यह मामला केवल एक जले हुए ट्रांसफार्मर का नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है जहां आमजन मदद मांगता है और बदले में उसे जिम्मेदारी का बोझ उठा दिया जाता है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
श्रीराम गौशाला कोलीवाड़ा की यह घटना सुमेरपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी गौशाला, किसान या आम उपभोक्ता को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।