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ड्रोन सर्वे और ई-रवाना बंद होने से बढ़ा विवाद, खनन पट्टाधारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
सीधा सवाल। छोटीसादड़ी। प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी क्षेत्र में रेड ऑकर (गेरू) खदानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। खनन पट्टाधारियों का आरोप है कि खनिज विभाग ने बिना किसी लिखित आदेश, नोटिस या आधिकारिक सूचना के खदानों की ई-रवाना (रॉयल्टी) सुविधा बंद कर दी, जिससे पिछले आठ दिनों से अधिकांश खदानों में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है। खदानों के बंद होने से क्षेत्र के करीब 2000 लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है। मामले को लेकर क्षेत्र के रेड ऑकर खनन पट्टाधारियों ने एसडीएम यतीन्द्र कुमार पोरवाल को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे धरना-प्रदर्शन और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
खनन पट्टाधारियों का आरोप है कि 3 जून को दोपहर करीब 12 बजे प्रतापगढ़ जिले की रेड ऑकर खदानों की ई-रवाना आईडी अचानक बंद कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में न तो कोई लिखित आदेश जारी किया गया और न ही कोई ई-मेल अथवा विभागीय सूचना दी गई। खदान संचालकों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में किसी भी कार्रवाई से पहले नोटिस और जवाब का अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां सीधे खदानों का संचालन प्रभावित कर दिया गया।
पट्टाधारियों का कहना है कि खनिज विभाग मौखिक निर्देशों के आधार पर कार्रवाई कर रहा है, जिससे खनन व्यवसायियों में असमंजस और नाराजगी है। उनका आरोप है कि विभाग की इस कार्यप्रणाली से वैध खनन कार्य करने वाले लोग भी परेशान हो रहे हैं।
ड्रोन सर्वे पर उठाए सवाल
बैठक में खदान संचालकों ने ड्रोन सर्वे को भी विवाद की जड़ बताया। उनका कहना है कि जिन खदानों को लेकर कार्रवाई की जा रही है, उनका आकलन ड्रोन सर्वे के आधार पर किया गया है, जबकि सर्वे के दौरान कई खदानों में पानी भरा हुआ था। ऐसे में वास्तविक खनन क्षेत्र और भंडारण की सही स्थिति सामने नहीं आ सकती।
पट्टाधारियों ने मांग की कि यदि किसी खदान की माप या जांच करनी है तो ड्रोन सर्वे के बजाय मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि पूर्व में भी ड्रोन सर्वे आधारित कार्रवाई न्यायालयों में चुनौती का विषय बन चुकी है।
400 मजदूरों सहित 2000 लोगों पर असर
खदानें बंद होने का सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग पर पड़ा है। खनन व्यवसायियों के अनुसार करीब 400 दिहाड़ी मजदूर सीधे तौर पर रोजगार से वंचित हो गए हैं। इसके अलावा ट्रक और ट्रैक्टर चालक, मशीन ऑपरेटर, चौकीदार, मुनीम, ट्रांसपोर्टर, धर्मकांटा संचालक और अन्य कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर लगभग 2000 लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि खदानें बंद होने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है। कई मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
सरकार को भी हो रहा राजस्व नुकसान, आंदोलन की चेतावनी
पट्टाधारियों का दावा है कि जिन खदानों की ई-रवाना बंद हुई है, उनकी उत्पादन क्षमता लाखों टन है। ऐसे में खदानों का संचालन बंद रहने से सरकार को भी रॉयल्टी और अन्य मदों में राजस्व नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि रेड ऑकर खनन से जुड़े उद्योग और परिवहन गतिविधियां प्रभावित होने से स्थानीय बाजार पर भी असर दिखाई देने लगा है।
खनन पट्टाधारियों ने प्रशासन से मांग की है कि ई-रवाना सुविधा तत्काल बहाल की जाए, ड्रोन सर्वे आधारित कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और खनन कार्य दोबारा शुरू कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के खदान संचालक और मजदूर संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और खनिज विभाग की होगी।