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एकादशी पर सेवा और संस्कार का संगम, विठ्ठल भगवान शिव वाटिका के सहयोग से गौमाताओं के लिए पहुंचा चारा
पुखराज कुमावत।सुमेरपुर।भारतीय संस्कृति में गौसेवा को सर्वोच्च पुण्य कार्य माना गया है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए गुरुवार को ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष एकादशी के पावन अवसर पर श्री राम गौशाला सेवा समिति कोलीवाड़ा में गौसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मूलचंद नामदेव की प्रेरणा से श्री विठ्ठल भगवान शिव वाटिका की ओर से गौमाताओं के लिए हरे चारे से भरी एक ट्रॉली भेंट की गई।गौशाला परिसर में चारे से भरी ट्रॉली पहुंचते ही गौसेवकों और पदाधिकारियों में प्रसन्नता का माहौल छा गया। इस सहयोग से गौशाला में निवासरत गौमाताओं के लिए चारे की व्यवस्था को मजबूती मिली तथा सेवा कार्यों में जुटे कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ा।गौशाला पदाधिकारियों ने इस सेवा कार्य को गौसेवा के प्रति समर्पण, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए भामाशाहों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गौशालाओं के सुचारू संचालन में समाज के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है और ऐसे सेवाभावी लोगों की बदौलत ही गौसेवा की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।गौशाला अध्यक्ष धीरज सांखला ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों की प्रतीक हैं। उनकी सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवदया और मानवता का सर्वोच्च स्वरूप है। गौशालाओं में चारे और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था में समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सहयोग से न केवल गौशालाओं को संबल मिलता है, बल्कि समाज में सेवा और संस्कार की भावना भी मजबूत होती है।इस अवसर पर गौशाला परिवार ने श्री विठ्ठल भगवान शिव वाटिका तथा सभी सहयोगी भामाशाहों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा कार्यों की कामना की। पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के सहयोग और गौभक्तों की सहभागिता से ही गौशालाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और गौवंश की बेहतर देखभाल संभव हो पाती है।कार्यक्रम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवलाल परिहार, व्यवस्थापक पुखराज कुमावत, खीमाराम कुमावत, मोहनदास वैष्णव सहित गौशाला समिति के सदस्य एवं गौभक्त उपस्थित रहे।
सीधा सवाल विशेष
आज के दौर में जहां अधिकांश लोग व्यक्तिगत व्यस्तताओं और स्वार्थों में उलझे हुए हैं, वहीं गौसेवा के लिए आगे आ रहे भामाशाह समाज को सेवा, संवेदना और संस्कार का संदेश दे रहे हैं। गौमाता के लिए किया गया प्रत्येक सहयोग न केवल गौशालाओं को मजबूती देता है, बल्कि समाज में करुणा, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है। ऐसे प्रेरक कार्य नई पीढ़ी के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण बन रहे हैं। :::