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पुरातत्व विभाग के खिलाफ दुर्गवासियों का प्रदर्शन

सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। विश्व विख्यात चित्तौड़ दुर्ग की आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोग पुरातत्व विभाग के रवैए को लेकर खफा है। पुरातत्व विभाग के खिलाफ दुर्ग स्थित रामपोल के यहां पर रविवार को धरना देकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझाईश की। दुर्ग पर पिछले छह माह में जम कर नियम विरुद्ध काम हुवे है। कई लोगों ने तो पर्दे के पीछे मिली छूट का फायदा उठा कर व्यवसायिक निर्माण कर दिए। वहीं अब दुर्ग के लोगों ने मकानों की मरम्मत के काम शुरू किए तो निर्माण सामग्री ले जाने पर ही रोक लगा दी। इससे दुर्ग की आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोग सड़कों पर उतर आए हैं। साथ ही निर्माण सामग्री दुर्ग पर ले जाने की मांग से पुरातत्व विभाग एवं प्रशासन के अधिकारियों से अवगत करवाया है।
जानकारी में सामने आया कि वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार चित्तौड़ दुर्ग पर वर्षों से आबादी है। ऐसे में वर्षों से यहां लोग निवास कर रहे होकर मकान और दुकानें तक है। पर्यटन के चलते बाद में कई हैंडीक्राफ्ट, होटल, रेस्टोरेंट तक खुल गए। नियम तो यह है कि संरक्षित क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं हो सकता।पुरातत्व विभाग एवं प्रशासन की नाक के नीचे करीब छह माह पहले दुर्ग पर निर्माण सामग्री ले जाकर निर्माण कार्य शुरू हुवे थे। वैसे तो दुर्ग पर आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मकान आदि की मरम्मत होनी थी। लेकिन इसकी आड़ में राजनीति से जुड़े और रसूखात वालों ने व्यावसायिक निर्माण कर दिए। रोक के बावजूद धड़ल्ले से दुर्ग पर निर्माण सामग्री गई और काम हुवे। इन्हें रोकने की जहमत पुरातत्व विभाग ने नहीं उठाई थी। ऐसे में कई लोगों ने होटल, रेस्टोरेंट और हैंडीक्राफ्ट पर निर्माण हो गए। वहीं गत माह पुरातत्व विभाग ने अपना रुख बदलते हुए दुर्ग पर निर्माण सामग्री को लाने पर रोक लगा दी। ऐसे में जो दुर्गा के निवासी होकर मकान आदि की मरम्मत करवा रहे थे और आधा अधूरा कार्य हुआ था वह असमंजस में पड़ गए हैं। साथ ही कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। इसे लेकर करीब एक सप्ताह से दुर्ग के निवासी लगातार मांग उठा रहे थे। वहीं रविवार को पर्यटकों की संख्या को देखते हुए दुर्ग पर रामपोल के यहां पर चक्का जाम की चेतावनी दी थी। इसकी सूचना मिलने पर चित्तौड़गढ़ तहसीलदार राहुल धाकड़ मौके पर पहुंचे। साथ ही कोतवाली थानाधिकारी भवानी सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया गया। दुर्ग के निवासियों ने बाद में एक चबूतरे पर धरना दिया। इसमें कई महिलाएं भी शामिल रही। इस दौरान पुलिस एवं प्रशासन की ओर से समझाईश की गई। इसके बाद यहां से धरना हटाया गया। लेकिन इन सब में एक बात यह सामने आई कि पुरातत्व विभाग अतिक्रमण होने के मामले में मौन दिखाई देता है तो वहीं दूसरी तरफ दुर्गा निवासियों के मकान पर चल रहे काम को रोकने में आगे रहता है।
6 माह में 77 लोगों को दिया नोटिस
पुरातत्व विभाग भले ही अब सख्ती बरत रहा हो लेकिन विभाग के अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए पूरी व्यवस्था की है, और नोटिस जारी कर इति श्री कर ली। इससे कि अवैध निर्माण के मामले में कार्यवाही नहीं करने की गाज प्रशासन पर पड़े। गत 6 माह में चित्तौड़ दुर्ग पर नियम विरुद्ध निर्माण के मामले में विभाग ने 77 लोगों को नए नोटिस जारी किए हैं। वहीं इससे पूर्व में भी सैकड़ों नोटिस जारी किए थे। लेकिन सख्ती से अवैध अतिक्रमण हटाने के प्रयास नहीं हुवे।
आखिर विरासत से क्यों नहीं हट रहे अतिक्रमण
वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार चित्तौड़ दुर्ग पर अतिक्रमण का दंश बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही अवैध निर्माण भी हुए हैं। जो स्थानीय लोग हैं और वर्षों से रहे हैं उनके पुराने हो चुके भवनों की मरम्मत होना भी जरूरी है। लेकिन इन सब के बीच अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण की जो शिकायतें मिलती है उन पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है। पुरातत्व विभाग विश्व विरासत से अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को रोकने में पंगु साबित हो रहा है। इस संबंध में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से कोई जवाब देते नहीं बन रहा हैं।
दुर्ग निवासी मुकेश नीलमणी ने बताया
कि वे पुरातत्व विभाग की नीतियों के खिलाफ यहां कर बैठे हैं। पुश्तों से हम लोग यहां पर रह रहे हैं। हमारी आठ से दस पुश्तें यहां रह रही है। हमें निर्माण स्वीकृति के लिए बार-बार अनुमति लेनी पड़ती है, जो हमें काफी समय से मिलती नहीं है। तो इन नीतियों के निरोध में हम बैठे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे बस्ती क्षेत्र में जर्जर मकान है, मूल भूत आवश्यकताओं में मकान भी शामिल है। इन सभी की हमें अनुमति दी जाए। हमें हमारे जीवन यापन के लिए छत दी जाए। मकान बनाने के लिए निर्माण की स्वीकृति दी जाए। पूरे दुर्ग गांव के लोग प्रदर्शन में शामिल हुवे हैं। लोगों में काफी आक्रोश भी है। हमें आश्वासन यह मिला है कि मकान की जो मरम्मत है, उसकी मरम्मत का एक पत्र मांगा है। पिछले आठ-दस दिन से निर्माण सामग्री ले जाने से रोका जा रहा था। हमारे से नल और बिजली के बिल, वोटर आईडी कार्ड आदि मांगे हैं।
वर्जन...
दुर्ग पर अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के मामले में छह माह में 77 लोगों को नए नोटिस जारी है। अतिक्रमण हटाने के लिए पुरातत्व विभाग एवं प्रशासन की संयुक्त कमेटी होती है। पुरातत्व विभाग के स्थानीय एवं उच्च अधिकारी भी शामिल रहते हैं।
प्रेमचंद शर्मा, संरक्षण सहायक, पुरातत्व चित्तौड़गढ़
