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आखिर कौन दे रहा भूमाफिया को संरक्षण
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। जिले के सुंयोजित नगर विकास को अमली जामा पहनाने वाले नगर विकास न्यास, नगर परिषद जैसी संस्थाओं के होते हुए अवैध रूप से कृषि भूमि को कॉलोनी बता कर बेचने के लिए भूमाफिया लगातार सक्रिय है। चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में चर्चित चंद्रनगर के मामले में एक नई जानकारी सामने आई है। यहां भूखंड लेने वालों के साथ अनुबंध तो 800 स्क्वायर फीट के भूखंड का किया जा रहा है लेकिन रजिस्ट्री कृषि भूमि में हिस्सेदारी की हो रही है। इससे लगने लगा है कि भूमि की रजिस्ट्री करवाने के लिए बनाए गए नियम भी यहां केवल औपचारिक साबित हो रहे हैं। इस संबंध में की जाने वाली भौतिक जांच और पटवारी रिपोर्ट से लेकर कहीं बिंदुओं पर मिली भगत की आशंका को बल मिल रहा है। ऐसे में अब सवाल यह है कि जो लोग पंजीकरण करवा कर सरकार को टैक्स देकर प्रॉपर्टी का व्यवसाय कर रहे हैं उन लोगों की क्या गलती है जबकि सीधे-सीधे कृषि भूमि को भूखंड बता कर बेचा जा सकता है तो नगर विकास न्यास नगर परिषद और स्थानीय निकाय उनसे भू उपयोग परिवर्तन की राशि क्यों वसूल रहे हैं।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव अब रजिस्ट्री में भी गड़बड़झाला
उल्लेखनीय है कि इनामी लॉटरी के माध्यम से महंगे उपहार का झांसा देकर भूखंड बेचने वाले इन भू माफियाओं की कथित चंद्र नगर कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं का तो अभाव है ही रजिस्ट्री में भी गड़बड़ सामने आ रही है। चंद्रनगर में भूखंड बेचने के लिए यह भू माफिया खरीदार के साथ एक अनुबंध कर रहे हैं जिसमें भूखंड नंबर का उल्लेख करते हुए 800 स्क्वायर फीट का भूखंड बेच रहे हैं। वहीं दूसरी और गंगरार तहसील में रजिस्ट्री के दौरान कृषि आराजी में हक बंटवारे का पंजीयन करवा रहे हैं। इससे साफ है कि अवैध रूप से चंद्रनगर के मामले में अनुबंध अलग हो रहे हैं और रजिस्ट्री अलग तरीके से करवाई जा रही है। यह सीधी सीधी धोखाधड़ी करते हुए आवासीय भूमि भूखंड के लिए लगने वाले टैक्स को चुराने का काम भी किया जा रहा है। जो सरकार के साथ सीधी धोखाधड़ी है।
तो फिर कागजों में हो रही मौका रिपोर्ट...!
किसी भी भूमि के रजिस्ट्री के लिए उसकी मौका निरीक्षण रिपोर्ट मनाई जाती है। रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी के समक्ष अधीनस्थ अधिकारियों की लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत होती है जिसमें भूमि का प्रकार मौके की स्थिति जैसे विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट की जाती है। इसके लिए अलग-अलग स्तर पर अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। गंगरार उप रजिस्ट्रार कार्यालय में मूंगा का खेड़ा के नाम से कृषि भूमि की बंटवारा रजिस्ट्री को लेकर मौका निरीक्षण करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर रजिस्ट्री करवाने वालों तक कि इस धोखाधड़ी में सरकारी स्तर पर हो रही मिली भगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। सामने आए दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि कृषि भूमि को भूखंड बात कर रजिस्ट्री करवाने के मामले में मौका निरीक्षण रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी है। और संभव है कि गंगरार तहसील कार्यालय से नियुक्त अधिकारी मिली भगत से अथवा अपने निजी फायदे को देखते हुए इस कारनामें को अंजाम देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि ऐसी कितनी रजिस्ट्री और पंजीकरण हुए हैं जिनमें इस प्रकार की रिपोर्ट बनाते हुए राजस्व को चूना लगाया गया है। यह भी एक बड़ी जांच का विषय है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की रजिस्ट्री के मामले में पूर्व में जिले में अलग-अलग स्थान पर जांच हो चुकी है जिनमें ऐसी गड़बड़ियां सामने आई है। लेकिन इस पूरे मामले में सरकार की आंखों में धूल झोंकने वाले ऐसे भूमाफियाओं को सरकार की ही अधिकारियों और कार्मिकों का संरक्षण प्राप्त हो रहा है जिससे यह सब संभव हो पा रहा है।
आखिर संरक्षण किसका जिम्मेदार मौन क्यो..?
इस पूरे मामले में सूत्रों की माने तो जिले में अलग-अलग पदों पर पद स्थापित रहे एक बड़े अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है या दूसरे शब्दों में कहें तो इस अधिकारी के संरक्षण में यह पूरा खेल चलाया जा रहा है। बिना मौका देख रजिस्ट्री भूखंड को कृषि भूमि बात कर पंजीकरण बिना भू रूपांतरण के सरकार को चूना लगाकर दोहरा नुकसान करना बिना मिली भगत और बड़े स्तर की मिली भगत के संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर इस पूरे षडयंत्र में शामिल कई सफेदपोश चेहरों से भी नकाब उतर सकता है।
और कितने अवैध चन्द्रनगर...!
चित्तौड़गढ़ की उप नगरीय क्षेत्र चंदेरिया में कृषि भूमि पर लॉटरी के जरिए भूखंड बेचने का यह मामला कहीं गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सुनियोजित नगर विकास के लिए जिम्मेदार इकाइयों के अस्तित्व पर यह अवैध चंद्रनगर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में कॉलोनी काटकर लोगों को भूखंड बेचने वाले प्रॉपर्टी व्यवसाययों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि नियम अनुसार फाइल लगाने दस्तावेज उपलब्ध करने के बावजूद लंबे समय तक भू रूपांतरण नहीं हो पाता है। मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए भी पट्टे रोक कर रखे जाते हैं लेकिन सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद चल रहे इस गड़बड़झाले से नियम अनुसार काम करने वाले लोगों में भी नाराजगी है। फिलहाल इस मामले में जांच की बात कही जा रही है लेकिन जांच कहां तक पहुंची इसे लेकर कोई स्पष्ट जवाब जिम्मेदारों के पास नहीं है। इससे लगने लगा है कि पूरे कुएं में भांग घुली हुई है।