चित्तौड़गढ़ - भाड़ में जाए परीक्षाएं भीड़ में जाए विद्यार्थी, परीक्षाओं के बीच शिक्षा विभाग का आदेश
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रन फ़ॉर विकसित राजस्थान के लिए जारी किये आदेश

सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। किसी भी आयोजन के लिए सफलता का पैमाना उस आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या के आधार पर लगाया जाता है। वही जब कोई सरकारी कार्यक्रम होता है तो उसे सफल दिखाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी महकमों के कर्मचारी और खास तौर पर स्कूली विद्यार्थी शामिल किए जाते हैं। वर्तमान में शिक्षा विभाग के नए कार्यक्रम के अनुसार एक अप्रैल से नवीन सत्र प्रारंभ करना है उसे लेकर परीक्षा आयोजित की जा रही है इन्हीं परीक्षाओं के बीच जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय माध्यमिक का एक आदेश परेशानी का सबब बन रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक के कार्यालय से अतिरिक्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार दशोरा द्वारा एक आदेश जारी किया गया है जिसमें शहरी क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी और निजी विद्यालय से कक्षा 9 और 11 के 50-50 विद्यार्थीयों को अनिवार्य रूप से रन फ़ॉर विकसित राजस्थान कार्यक्रम शामिल होने के लिए आदेशित किया गया है। जबकि वर्तमान में बच्चों की परीक्षाएं चल रही है। हालांकि कार्यक्रम को लेकर रविवार का दिन निर्धारित किया गया है लेकिन इससे पहले आदेश में स्पष्ट है कि बच्चों को पूर्व अभ्यास करवाना है। इस आदेश में जिला कलेक्टर के आदेश का हवाला दिया गया है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि बच्चों की परीक्षाओं से ज्यादा जरूरी सरकारी कार्यक्रम की भीड़ है। और ऐसा लगने लगा है की परीक्षाएं जाए भाड़ में विद्यार्थी पहले भीड़ में शामिल हो।


नहीं आते कर्मचारी इसलिए विद्यार्थियों को बुलाया

 
15 मार्च को लगभग साढ़े 3 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर इस दौड़ का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बात और जिला शिक्षा अधिकारी हस्ताक्षर करने वाले जितेंद्र दशोरा के आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि जिला कलेक्टर के आदेश के अनुसार यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें प्रत्येक शहरी क्षेत्र की निजी एवं सरकारी विद्यालय से कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों को शहीद मेजर नटवर सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लेकर आना है। कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उन्हें तीन-तीन की पंक्तियों में दौड़ने का पूर्व अभ्यास करवाना है। अब बच्चे भीड़ का हिस्सा बनने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़कर इसका अभ्यास करें क्योंकि उन्हें राजस्थान को विकसित दिखाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला कलेक्टर के आदेश प्राप्त हुए है। बड़ी बात यह है कि विद्यार्थियों को लाने के लिए व्यवस्था भी विद्यालय प्रबंधन को अपने स्तर पर करनी है। जब कार्यक्रम सरकारी है तो सरकारी कार्मिकों को बुलाया जाए परीक्षाओं के बीच इस तरह बच्चों के लिए और खास तौर पर उन विद्यार्थियों के लिए जिनके परीक्षाएं हैं उन्हें बुलाना केवल भीड़ जुटाने से अधिक कुछ भी नहीं है।

एक दिन नहीं पढ़ेंगे तो कुछ नहीं होगा : दशोरा

 
जिला कलेक्टर के आदेश का हवाला देकर आदेश जारी करने वाले अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार दशोरा से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि रविवार के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है वैसे भी बच्चे दौड़ते हैं और एक दिन में कोई खास फर्क नहीं पड़ता है। इसे अगर गंभीरता से समझा जाए तो उनका कहने का मतलब है कि पढ़ लिखकर बच्चों को कुछ हासिल नहीं होना है। वही जब उनसे चित्तौड़गढ़ जिले में एथलेटिक्स की विभिन्न दौड़ प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय स्तर चित्तौड़गढ़ से चयनित होने वाले विद्यार्थियों की जानकारी मांगी गई तो अधिकारी महोदय बगले झांकते नजर आए। इससे साफ है कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य केवल सरकारी कार्यक्रमों में बच्चों के जरिये केवल भीड़ इकट्ठा करने का रह गया है। उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि 2000 बच्चे लाने का टारगेट मिला है हम कहा से लेकर हैं। वहीं इस संबंध में लिखित आदेश मांगे जाने पर उन्होंने कहा कि अधिकारी ऐसी कोई लिखित आदेश देते हैं क्या ? यह सब मीटिंग में बात हुई थी। इससे स्पष्ट है कि अपने ही विभाग के कर्मचारियों को लाने में और कार्यक्रम से जोड़ने में असफल रहने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी अब जिला कलेक्टर के माथे ठीकरा फोड़ कर विद्यार्थियों को होने वाले नुकसान से पल्ला झाड़ रहे हैं।

निपट गई है बोर्ड परीक्षाएं स्थानीय परीक्षाएं जारी


कक्षा 12 कक्षा 10 कक्षा 8 कक्षा 5 की बोर्ड परीक्षाएं पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर परीक्षाएं लगातार जारी है। और क्योंकि सरकारी कार्यक्रम को सफल बनाना है इसलिए परीक्षा देने वाले कक्षा 9 और 11 के बच्चों को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाने का आदेश जारी किया गया है।

यह है कार्यक्रम का उद्देश्य


मूल रूप से इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के साथ-साथ आम जन को जोड़ने का है लेकिन क्योंकि आमजन सरकारी कार्यक्रमों से दूरी बनाते हैं इसलिए अलग-अलग अवसरों पर सरकारी विद्यालय अथवा निजी विद्यालय के बच्चों को इन कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है जिससे कि संख्या दिखाकर इज्जत बताई जा सके लेकिन इस बार परीक्षाओं के बीच इस प्रकार का कार्यक्रम आ जाने से शिक्षा विभाग में से आदेश जारी किए हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि केवल सरकारी विद्यालयों के समस्त स्टाफ को ही इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आदेशित किया जाए तो 500 से 700 तो केवल कार्मिक ही हो सकते हैं लेकिन क्योंकि कार्मिक भी अपने रविवार के अवकाश का नुकसान नहीं करना चाहते इस संभावना को देखते हुए इस प्रकार का आदेश जारी किया गया है। जो सीधे-सीधे परीक्षाओं के स्थान पर बच्चों को भीड़ तंत्र का हिस्सा बनने के लिए मुफीद साबित हो रहा है।


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