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भुवनेश व्यास
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। राजस्थान के अफीम उत्पादक किसान जो अब तक डोडा चूरा नष्ट नहीं करवा रहे थे उन पर इस बार सख्ती बरती जाएगी और नष्टीकरण की घोषणा नहीं करने पर इस वर्ष पट्टा नहीं मिलेगा।
राजस्थान आबकारी विभाग ने इस वर्ष फिर से चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़, बारां तथा कोटा के अफीम किसानों के लिए डोडा चूरा नष्टीकरण की समय सीमा तीस अगस्त निर्धारित कर इस बार नियमों में सख्ती करते हुए संबंधित जिला आबकारी अधिकारियों को निर्देश दिये है कि वे ऐसे अफीम किसानों जो डोडा चूरा नष्टीकरण का घोषणा पत्र नहीं देते हैं उनकी सूची बनाकर इस वर्ष 2026-27 के लिए अफीम पट्टे के लिए अयोग्य घोषित करने के लिए नारकोटिक्स विभाग को दें। डोडा चूरा नष्टीकरण के लिए एक जिला स्तरीय समिति गठित की गई है जिसमें नोडल अधिकारी जिला आबकारी अधिकारी होंगे जबकि पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के प्रतिनिधि सदस्य होंगे और इनकी उपस्थिति में ही संबंधित किसान से घोषणा पत्र भरवाकर नष्टीकरण किया जाएगा।
जिला आबकारी अधिकारी गजेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि हमने इस कार्यक्रम की तैयारियां प्रारम्भ कर दी है और क्षेत्र बांटकर आबकारी निरीक्षकों को अपने अपने क्षेत्र में डोडा चूरा नष्टीकरण की तारीख तय करने को कहा है जिसके बाद विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में डोडा चूरा की खरीद फरोख्त प्रतिबंधित होने के बाद प्रतिवर्ष आबकारी विभाग नष्टीकरण कार्यक्रम जारी करता है लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण आज तक किसी किसान ने डोडा चूरा नष्ट नहीं करवाया और तस्करी करते रहे, इस बार पट्टा निरस्तीकरण का नियम डालना नशे पर रोकथाम की सख्त मंशा को जाहिर करता है।