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मंत्रियों ने परखी व्यवस्थाएं, लाभार्थियों ने कहा—अब योजनाएं फाइलों में नहीं, सीधे जनता के हाथों तक पहुंच रही हैं
उपखंड प्रशासन और नगर पालिका की समन्वित कार्यशैली बनी चर्चा का विषय, शिविर में दिखी प्रशासनिक दक्षता की मिसाल
पुखराज कुमावत
सीधा सवाल।सुमेरपुर। सरकार की योजनाएं तब सफल मानी जाती हैं जब उनका लाभ बिना भटकाव के सीधे आमजन तक पहुंचे। शनिवार को सुमेरपुर टाउन हॉल में आयोजित राज्य सरकार के विशेष जनकल्याणकारी शिविर में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां केवल औपचारिकताएं नहीं हुईं, बल्कि समस्याओं का समाधान हुआ, पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिला और प्रशासन आमजन के बीच खड़ा नजर आया। शिविर में उमड़ी भीड़ और लाभार्थियों के चेहरों पर दिखाई देता संतोष इस बात का प्रमाण था कि सुशासन का मॉडल अब धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है।
टाउन हॉल बना जनसुनवाई और जनसेवा का केंद्र
सुबह से ही टाउन हॉल परिसर में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। नगर पालिका, राजस्व, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, चिकित्सा, जलदाय, विद्युत, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों के काउंटरों पर लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया।
किसी को सामाजिक सुरक्षा पेंशन से राहत मिली, किसी को प्रमाण-पत्र मिला, तो किसी की वर्षों पुरानी समस्या का निस्तारण हुआ। लोगों का कहना था कि यदि प्रशासन इसी तरह जनता के बीच पहुंचकर काम करता रहा तो सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होगा।
मंत्रियों ने परखी व्यवस्थाएं, अधिकारियों से लिया फीडबैक
शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत एवं जिला प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विभिन्न विभागों के काउंटरों का बारीकी से अवलोकन किया। दोनों मंत्रियों ने अधिकारियों से संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आमजन को मिल रहे लाभों की समीक्षा की।
इस दौरान नगर पालिका सुमेरपुर के अधिशासी अधिकारी नरपत सिंह राजपुरोहित ने शिविर की व्यवस्थाओं, विभागवार प्रगति तथा आमजन को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। मंत्रियों ने विभिन्न काउंटरों पर पहुंचकर लाभार्थियों से भी संवाद किया और फीडबैक लिया।
एक छत के नीचे 21 विभाग, लोगों को मिली बड़ी राहत
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। इससे आमजन को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
लोगों ने कहा कि पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि प्रशासन स्वयं लोगों के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है। शिविर में करीब 21 विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया।
उपखंड प्रशासन और नगर पालिका की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय
शिविर के सफल संचालन में उपखंड प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन की समन्वित कार्यशैली की विशेष चर्चा रही। प्रशासक एवं उपखंड अधिकारी कालूराम कुम्हार की मॉनिटरिंग और अधिशासी अधिकारी नरपत सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में व्यवस्थाओं को जिस प्रकार सुव्यवस्थित किया गया, वह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
शिविर स्थल पर व्यवस्था, लाभार्थियों के लिए सुविधा, विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्य निष्पादन को लेकर लोगों ने प्रशासनिक टीम की सराहना की। कई लाभार्थियों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता के कारण ही शिविर प्रभावी और परिणामकारी बन सका।
लाभार्थियों ने जताया आभार
शिविर में लाभान्वित हुए लोगों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी, प्रशासक एवं उपखंड अधिकारी कालूराम कुम्हार, तहसीलदार हिमांशु कच्छवाहा तथा अधिशासी अधिकारी नरपत सिंह राजपुरोहित के प्रति आभार व्यक्त किया।
लाभार्थियों का कहना था कि योजनाओं का लाभ सीधे हाथों में मिलने से सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री दौरे की तैयारियों को भी परखा
शिविर के बाद मंत्रियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पंडाल, बैठक व्यवस्था, पेयजल, सफाई, पार्किंग और अन्य जनसुविधाओं का भी निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया गया। नगर पालिका और उपखंड प्रशासन द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
जब सुशासन नारे से निकलकर जमीन पर दिखा
दरअसल सुमेरपुर का यह शिविर केवल योजनाओं के वितरण का मंच नहीं रहा, बल्कि सरकार की उस सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया जिसमें प्रशासन जनता के द्वार तक पहुंचकर समस्याओं का समाधान करता है।
शनिवार को टाउन हॉल में दिखाई दिया दृश्य यह संदेश देता नजर आया कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सक्रियता और जनहित की भावना एक साथ जुड़ती है तो सुशासन केवल भाषणों का विषय नहीं रहता, बल्कि आमजन के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि में बदल जाता है।सुमेरपुर का यह शिविर यही बता गया कि विकास केवल योजनाएं बनाने से नहीं आता, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता से आता है। और जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि तथा व्यवस्था एक दिशा में काम करें, तब जनसेवा वास्तव में जनविश्वास का आधार बन जाती है।