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सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। जिले के गंगरार में स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने प्रदर्शन करते हुवे धरने कर बैठ गए। काफी देर विद्यार्थियों से समझाईश का दौर चला। प्रदर्शन की सूचना पर गंगरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची, जहां धक्का मुक्की की नौबत आ गई। छात्रों के रवैए को देखते हुवे यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 33 छात्र और 6 छात्राओं को निलंबित कर दिया है।
इस संबंध में गंगरार सीआई श्याम राज सिंह ने बताया कि गुरुवार को मेवाड़ यूनिवर्सिटी में कुछ विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सूचना मिली थी। शांति व्यवस्था के हिसाब से पुलिस थाने का जाब्ता मौके पर भेजा था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विद्यार्थियों से समझाइश का प्रयास किया। लेकिन विद्यार्थी नहीं माने और धरने पर बैठ गए। इस पर थाने का जाब्ता तैनात किया गया था। फिलहाल शांति बनी हुई है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन या विद्यार्थियों की और से पुलिस थाने में कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं करवाया है। रिपोर्ट मिलती है तो पुलिस नियमानुसार कार्यवाही करेगी।
यह है पूरा मामला
गंगरार यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों ने गुरुवार धरना शुरू किया। इस पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की घटना भी हुई। प्रशासन ने बीएससी नर्सिंग के 33 और जीएनएम के 6 छात्रों को सस्पेंड कर दिया।
छात्रों का कहना है कि वे 2022 बैच के हैं और मार्च में उनकी फाइनल परीक्षा है, लेकिन अब तक कोर्स को जरूरी मान्यता नहीं मिली है। उनका आरोप है कि बिना मान्यता के उनकी डिग्री बेकार हो जाएगी और वे न तो पंजीयन करवा पाएंगे और न ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
छात्रों के अनुसार, 2024 में भी इसी मुद्दे पर विरोध हुआ था। तब यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया था कि मान्यता नहीं मिलने पर उन्हें किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
फाइल सरकार के स्तर पर लंबित
इधर, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार सीडी कुमावत ने बताया कि नर्सिंग विद्यार्थियों की और से की जा रही हड़ताल तथ्यों पर आधारित नहीं है। यूनिवर्सिटी इन्हें सभी आवश्यक जानकारी पहले ही दे चुकी है। वर्ष 2022-23 में जब नर्सिंग कोर्स में प्रवेश प्रारंभ किया, उस समय हमारे पास सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय के आदेश उपलब्ध थे। उन्हीं आदेशों के तहत 2022-23 तथा 2023-24 में प्रवेश लिए। इसके बाद 2024-25 और 2025-26 में प्रवेश प्रक्रिया संपन्न की गई। जब विषय न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, तब न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष को सुनने के बाद आदेश दिया कि मेवाड़ विश्वविद्यालय को एनओसी प्रदान की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति हो तो 30 दिनों के भीतर पुनः निरीक्षण कराया जाए। रजिस्ट्रार ने बताया कि सरकार को और से निर्धारित अवधि में कोई पुनः निरीक्षण नहीं कराया गया। न ही एनओसी जारी की गई। इस प्रकार न्यायालय के आदेश से एनओसी स्वीकृत मानी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में जब सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर सभी नर्सिंग संस्थानों को एनओसी के लिए पुनः आवेदन करने को कहा, तब मेवाड़ विश्वविद्यालय ने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन किया।
जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति ने यूनिवर्सिटी परिसर का निरीक्षण कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी। वर्तमान में फाइल सरकार के स्तर पर लंबित है। हमें मौखिक रूप से अवगत कराया कि सीएमओ कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने तक फाइल को यथास्थिति में रखा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन निरंतर सचिवालय स्तर पर फाइल का अनुसरण कर रहा है, और संबंधित विभाग भी आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, एनओसी जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को RNC और INC दोनों की मान्यता प्राप्त होगी। सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद ही डिग्री प्रदान की जाएगी। किसी भी विद्यार्थी की डिग्री में देरी नहीं होगी, और उनका शैक्षणिक भविष्य पूर्णतः सुरक्षित है।