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आजादी के बाद से ही कुछ जनजाति क्षेत्रों में नहीं पहुंची बिजली- कृपलानी

सीधा सवाल। निम्बाहेड़ा। पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री एवं निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने सोमवार को राजस्थान विधानसभा के तीसरे सत्र के प्रश्नकाल के दौरान निम्बाहेड़ा विधानसभा की निम्बाहेड़ा और छोटीसादड़ी पंचायत समिति में विकास कार्यों को किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी विधानसभा के जनजाति क्षेत्र के कुछ गांवों में अभी भी आमजन को मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के साथ विकास काम किए जाने की आवश्यकता है।
इस दौरान उन्होंने छोटीसादड़ी पंचायत समिति के गांव पीलीखेड़ा का मामादेव, कटेड में आज के समय में भी बिजली नहीं होने की बात प्रमुखता से रखी। जिसके बदले में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने की बात कही और कहा कि जिन गांवों में बिजली नहीं है, उन्हें जल्दी ही कुसुम योजना से जोड़ा जाएगा।
विधायक कृपलानी ने अपने विधानसभा के पंचायत समिति निम्बाहेड़ा और छोटीसादड़ी में हो रहे विकास कामों का मुद्दा विधानसभा में उठाया। उन्होंने जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री से टीएसपी योजना के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों का विवरण मांगा। इस पर जनजातीय क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने जवाब देते हुए कहा कि पंचायत समिति निम्बाहेड़ा में बिखरी जनजाति योजना में एक ही गांव को लिया गया है, जबकि पंचायत समिति छोटीसादड़ी के सभी गांव अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत ही शामिल है।
विधायक कृपलानी ने कहा कि बिखरी जनजाति योजना में निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र के 163 राजस्व गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन पिछले 4 सालों में सिर्फ एक ही गांव सरसी में ही इस योजना के अंतर्गत विकास का काम किया गया है, जबकि अन्य गांव अभी भी अभावग्रस्त है और वहां पर विकास काम किया जा सकता है। इस पर मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि निम्बाहेड़ा विधानसभा में पिछले 4 सालों में 652 लाख के 65 कार्यों को वित्तीय स्वीकृति मिली है, जबकि कांग्रेस के मंत्री उस क्षेत्र के विधायक थे, उसके बावजूद भी काम नहीं किया।
उन्होंने बताया कि 53 काम पूरे हो चुके हैं, जो 9 काम किए जा रहे है और 3 कामों के टेंडर प्रक्रिया में है। अभी तक इन कामों पर 597.60 लाख रुपए लग चुके है। जबकि हमारी सरकार के आने के बाद एक साल में ही निम्बाहेड़ा में 22 कामों के लिए 456 लाख रुपयों की स्वीकृति के लिए वित्तीय विभाग को पत्रावली भेजी जा चुकी है। वित्तीय विभाग से राशि मिलते ही स्वीकृति जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा 1 करोड़ 85 लाख के 10 काम विचाराधीन है।
कृपलानी ने बताया कि टीएसपी योजना में आने वाले छोटी सादड़ी पंचायत समिति के कुछ गांव जैसे पीलीखेड़ा का मामा देव, कटेड गांवों में आज भी बिजली नहीं पहुंची। आजादी के बाद से अब तक कुछ गांव अंधेरे में ही रहने को मजबूर है। अंधेरे में ही अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे में सरकार को इन गांवों को चयनित करते हुए बिजली उपलब्ध करवाना चाहिए। इसके जवाब में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि बिजली देने का काम बिजली विभाग करता है। अगर आपके क्षेत्र में बिजली के डिमांड है, तो इसका प्रस्ताव भेजें। हम जल्दी ही कुसुम ए, बी और सी योजना में प्रस्ताव स्वीकार कर गांव तक बिजली पहुंचाएंगे।