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आरटीआई से दस्तावेजो में हुआ खुलासा
सीधा सवाल। चित्तौड़गढ़। प्रदेश में हाल ही में आयोजित हुई राज्य स्तरीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में हुए फर्जीवाड़े का खुलासा सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों में हुआ है। जो लोग चयनकर्ता नहीं थे उन्होंने टीम का चयन करते हुए सत्यापन किया। इससे साफ है कि भ्रष्टाचार और मनमानी की पराकाष्ठा शिक्षा विभाग में पार हो गई है। वही यह भी जानकारी सामने आ रही है की नियम विरुद्ध खर्च की गई राशि वसूल करने के लिए प्रमाण पत्र रोक कर दबाव बनाया जा रहा है। पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि सूचना के अधिकार में दस्तावेज प्राप्त करने को लेकर भी शिक्षा विभाग की खासी किरकिरी हुई। इससे साफ है कि शिक्षा विभाग अब भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है।
चयन में ढेरो खामियां...।
जिला स्तर पर इस बार आयोजित हुई खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू से ही विवादों में बनी रही है। उपजिला शिक्षा अधिकारी आजाद पठान, और उनके खास बने उनके अधीनस्थ कार्मिक सत्य प्रकाश गर्ग, राजू जिंदल द्वारा मिली भगत कर आदेश निकाले गए जिनके जरिए अपने खासम खास लोगों को चयन करता बनाया गया। अंतिम समय तक टीम का चयन नहीं हो पाया लेकिन अब सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि टीम के चयन में ऐसे लोग शामिल रहे जो जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी सूची में इस पद पर नहीं थे। अंतिम समय तक चयन सूची जारी नहीं होने से सूचना के अधिकार से प्राप्त किसी भी चयन सूची पर जारी करने की दिनांक नहीं है। इससे स्पष्ट है कि पूरी चयन प्रक्रिया में घाल मेल करते हुए मनमानी की गई है। सूचना के अधिकार से प्राप्त सत्यापित सूची में जहां चयन सूची जारी करने की कोई दिनांक नहीं है वही चयन करता के रूप में हस्ताक्षर करने वाले शारीरिक शिक्षक दलपत सिंह जिला स्तर द्वारा जारी सूची में चयन कर्ता नहीं है। इससे साफ है कि अपने मनमाने चयन को पूरा करने के लिए विधि विरुद्ध आदेश जारी किए गए जो कार्य क्षेत्र से बाहर होने के चलते रिकॉर्ड पर नहीं है। सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट है कि खेलो के नाम पर जमकर मनमानी की गई वही अब चांदी कूटने की कवायद भी जारी है।
नियम बाईपास करने में 'गुप्ता जी' गंभीर
इधर इस पूरे मामले में अनियमितता को दबाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जा रही है। हालत यह है कि प्रमाणित दस्तावेज देने का नियम होने के बिना सत्यापन के दस्तावेज तैयार कर दिए गए। सूचना के अधिकार के कार्यभार को संभाल रहे कार्मिक रूप किशोर गुप्ता ने आवेदन को लेकर दस्तावेज 17 अक्टूबर की दिनांक में तैयार कर दिए लेकिन उनका सत्यापन नहीं करवाया गया जब आवेदक दस्तावेज लेने पहुंचा तो बिना सत्यापन के दस्तावेज लेने से इनकार कर दिया। विरोध करने पर जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए 1 नवंबर को सत्यापित दस्तावेज उपलब्ध करवाये। उल्लेखनीय है कि सूचना के अधिकार में यदि कोई आवेदन करता है तो उसे प्रमाणिक दस्तावेज प्रदान किए जाते हैं लंबे समय से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय माध्यमिक में सूचना का कार्यभार संभाल रहे कार्मिक रूप किशोर गुप्ता नियमों के जानकारी होने के बावजूद इस प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध करा रहे थे जो किसी भी प्रकार से वैधानिक नहीं है। इससे स्पष्ट है कि उप जिला शिक्षा अधिकारी आजाद पठान के कारनामों को पूरा गिरोह बनाकर शह दी जा रही है। एक और जहां प्रदेश की भजन लाल सरकार पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही है वहीं जिले के सबसे बड़े कार्यालय में सामूहिक रूप से मिली भगत करते हुए भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है जो विभाग के जिम्मेदारों और सरकार की मुखिया की मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।
अब रोक लिए प्रमाण पत्र....।
जिले से प्रदेश स्तर पर सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। जो खिलाड़ियों के लिए उपयोगी है। पहले तो टीम के चयन में गड़बड़ी की गई अंतिम समय में टीम बनाकर भेजी गई। और इसके बावजूद कैंप आयोजन के नाम पर मनमानी राशि वसूल की जा रही है। नियमों से अधिक राशि खर्च कर अपनी जेब भरने वाले टीम के साथ गए लोग खिलाड़ियों के प्रमाण पत्र रोक कर बैठ गए हैं। और उनसे लगातार राशि की मांग की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में चाहे सूचना का अधिकार हो या चयन प्रक्रिया सब में खुला भ्रष्टाचार हो रहा है। अब देखने वाली बात है कि पूरे मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।